
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की तस्करी और प्रतिबंधों (Sanctions) का उल्लंघन करने वाले देशों पर अमेरिका लगातार सख्ती बरत रहा है। हाल ही में एक बड़ी कार्रवाई के तहत, अमेरिकी सरकार ने वेनेजुएला और ईरान के प्रतिबंधित तेल की तस्करी करने वाले दो बड़े तेल टैंकरों (Oil Tankers) को कबाड़ (Scrap) के भाव बेच दिया है। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुख्यात हो चुके इन दोनों जहाजों को अब नष्ट करने के लिए भारत लाया जा रहा है, जहां के शिपयार्ड्स में इन्हें पूरी तरह से तोड़कर स्क्रैप में तब्दील कर दिया जाएगा।
दुबई की कंपनी ने किया सौदा
ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन दोनों जहाजों की नीलामी अमेरिकी कोर्ट के आदेश के बाद की गई। दुबई स्थित विश्व प्रसिद्ध वेसल रिसाइकिलिंग फर्म **ग्लोबल मार्केटिंग सिस्टम्स (GMS)** ने पिछले महीने इन जहाजों को एक अज्ञात राशि में खरीदा है।
GMS के सीईओ अनिल शर्मा ने इस सौदे की पुष्टि करते हुए बताया, *”अमेरिकी सरकार ने हमें ये जहाज बेचे हैं और इस बिक्री को अधिकृत करने वाला बाकायदा एक कोर्ट का आदेश था। हालांकि, इसके साथ कई जटिलताएं भी जुड़ी हैं, जिनमें से सबसे बड़ी यह है कि हम वास्तव में नहीं जानते कि पहले इन जहाजों का असली मालिक कौन था।”*
कौन से हैं ये दो टैंकर और क्यों हुए थे जब्त?
जिन दो जहाजों को अमेरिका ने नीलाम किया है, उनका इतिहास काफी विवादास्पद रहा है। अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सैन्य विशेष बलों (Special Forces) ने इसी साल जनवरी में कड़े अभियानों के तहत इन्हें जब्त किया था।
पहला टैंकर – ‘एरा’ (Era):** यह जहाज पहले ‘मैरीनेरा’ और ‘बेला 1’ के नाम से जाना जाता था। इसे जनवरी में अटलांटिक महासागर में हफ्तों तक चले लंबे पीछा करने के बाद आइसलैंड के दक्षिण में समुद्र में जब्त किया गया था। अमेरिका का कहना है कि यह जहाज कैरेबियाई क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा दे गया था और इसका इस्तेमाल वेनेजुएला और ईरान के प्रतिबंधित तेल को ढोने के लिए किया जाता था।
दूसरा टैंकर – ‘लिलियो’ (Lileo):** इस जहाज को पहले ‘गैलीलियो’ और ‘वेरोनिका’ के नाम से समुद्र में उतारा गया था। इसे भी जनवरी में कैरेबियन सागर में अमेरिकी बलों द्वारा जब्त किया गया था। यह जहाज रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आता था।
हैरानी की बात यह है कि जब ये दोनों ही टैंकर पकड़े गए, तब इन पर रूस का झंडा (Russian-flagged) लगा हुआ था।
प्रतिबंधों से बचने का ‘डार्क फ्लीट’ गेम
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए जहाजों का यह माफिया एक खास रणनीति अपनाता है, जिसे ‘डार्क फ्लीट’ (Dark Fleet) या घोस्ट शिप्स कहा जाता है। ये जहाज समुद्री रडार और ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) को बंद कर देते हैं और अधिकारियों को चकमा देने के लिए बार-बार अपना नाम, रजिस्ट्रेशन और झंडा बदलते रहते हैं। यही कारण था कि GMS जैसी बड़ी कंपनी को भी इनके मूल मालिकों का पता नहीं चल सका। बता दें कि अमेरिका ने वेनेजुएला में अपनी कार्रवाई के दौरान ऐसे करीब 10 तेल टैंकरों को जब्त किया है।
भारत के शिपयार्ड्स में होगा अंतिम संस्कार
इस कानूनी खरीद के बाद इन विवादित जहाजों का अगला और अंतिम पड़ाव भारत होगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग का घर है (विशेषकर गुजरात स्थित अलंग शिपयार्ड)।
इन विशाल जहाजों को भारत के कबाड़खानों (Scrap Yards) में लाया जाएगा। भारतीय इंजीनियर और मजदूर इन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। इसमें सबसे पहले जहाजों से खतरनाक रसायनों और बचे हुए तेल को साफ किया जाएगा, उसके बाद विशाल गैस कटर की मदद से लोहे की मोटी चादरों को काटा जाएगा। इनके धातु (Steel) को गलाकर फिर से भारत के अन्य औद्योगिक और निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा।
वैश्विक राजनीति पर प्रभाव
अमेरिका की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि वेनेजुएला, ईरान और रूस जैसे देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर वह किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। अवैध रूप से तेल परिवहन करने वाले जहाजों को न केवल जब्त किया जा रहा है, बल्कि उन्हें स्क्रैप में बदलकर हमेशा के लिए उनके अस्तित्व को मिटाया जा रहा है ताकि अवैध तेल सिंडिकेट की कमर तोड़ी जा सके।
