Wednesday, November 4, 2026

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पड़ा भारी! CJP के दो नेता 5 दिन के लिए तिहाड़ जेल भेजे गए

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दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर Cockroach Janta Party (CJP) के नेताओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। पार्टी के दो नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की अदालत में पेश किए जाने के बाद यह आदेश दिया गया। दोनों नेताओं को दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को हिरासत में लिया था। उन पर जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने और पहले से लागू शांति बनाए रखने की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप हैं।

इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि दोनों नेताओं ने पहले दिए गए बांड की शर्तों का उल्लंघन किया। मामले में पुलिस के आरोपों और पार्टी के दावों के बीच अब कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?

पूरा मामला 13 अक्टूबर को सामने आया, जब सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और CJP के अन्य कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रवेश रोकने के लिए लगाए गए बंद गेट और पुलिस बैरिकेडिंग को पार किया और परिसर में दाखिल हो गए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ, जब जंतर-मंतर को दिल्ली में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद वहां विरोध प्रदर्शन करने को लेकर विवाद पैदा हो गया।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी भारतीय राष्ट्रीय ध्वज लेकर परिसर में प्रवेश करते और नारे लगाते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने मौके पर हस्तक्षेप किया और प्रदर्शन में शामिल लोगों को हिरासत में ले लिया।

इस घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों और कथित नियम उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की। हालांकि, घटना से जुड़े सभी आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार, 14 अक्टूबर को मंदिर मार्ग स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। अदालत के आदेश के बाद दोनों नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस का आरोप है कि दोनों नेताओं ने पहले रिहाई के समय शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड की शर्तों का पालन नहीं किया। पुलिस के मुताबिक, इन शर्तों के तहत दोनों को एक साल तक ऐसी गतिविधियों से दूर रहने का आश्वासन देना था, जिनसे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो।

पुलिस ने मामले में कथित अनधिकृत प्रवेश, निषेधाज्ञा के उल्लंघन, शांति बनाए रखने के बांड की शर्तें तोड़ने और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने जैसे आरोप लगाए हैं।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध साबित होने के बराबर नहीं हैं। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

पहले भी हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता

सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, उस समय दोनों नेताओं ने 50-50 हजार रुपये के बांड भरकर रिहाई हासिल की थी। इन बांड की शर्तों के तहत उन्हें एक साल तक ऐसी गतिविधियों से दूर रहने का आश्वासन देना था, जिनसे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो।

पुलिस का दावा है कि 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुई घटना इन शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी है। इसी आधार पर दोनों नेताओं के खिलाफ दोबारा कार्रवाई की गई।

वहीं, CJP की ओर से इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई है। पार्टी का कहना है कि उसके नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को प्रदर्शन और विरोध के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। पुलिस और पार्टी के इन अलग-अलग दावों के बीच मामले का कानूनी पक्ष अहम हो गया है।

अजिंक्य शिंदे को मिली रिहाई

इसी मामले में हिरासत में लिए गए CJP नेता अजिंक्य शिंदे को अलग बांड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिंदे ने पांच हजार रुपये का बांड भरा था।

सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने, जबकि अजिंक्य शिंदे को रिहा किए जाने से इस मामले में तीनों नेताओं की स्थिति अलग हो गई है। हालांकि, शिंदे की रिहाई का अर्थ यह नहीं है कि घटना से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं का निपटारा हो गया है।

अभिजीत दिपके ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दोनों नेताओं की गिरफ्तारी की आलोचना की है। उनका आरोप है कि नेताओं को तिरंगा फहराने और विरोध प्रदर्शन करने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक असहमति को दबाने की कोशिश बताया।

पार्टी की कानूनी टीम ने भी आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए सदस्यों को समय पर वकीलों तक पहुंच नहीं दी गई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया और स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

इस मामले ने प्रदर्शनकारियों के अधिकारों, पुलिस की कार्रवाई और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ पुलिस शांति बनाए रखने की शर्तों के कथित उल्लंघन का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ CJP ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर बढ़ा विवाद

जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। इसलिए वहां प्रदर्शन से संबंधित नियमों और प्रतिबंधों को लेकर होने वाली कार्रवाई पर व्यापक ध्यान जाता है।

इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों और CJP की ओर से उठाए गए सवालों पर क्या स्थिति सामने आती है।

फिलहाल, सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद मामले की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। पुलिस के आरोप, पार्टी की प्रतिक्रिया और अदालत में सामने आने वाले तथ्य इस पूरे घटनाक्रम के अगले चरण को तय करेंगे।

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