Monday, September 7, 2026

राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: सावरकर मानहानि केस रद्द, समन खारिज

Share

 


नई दिल्ली: स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को लेकर दिए गए बयान के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत और निचली अदालत द्वारा जारी समन को पूरी तरह से रद्द (Quash) कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक राज्य सरकार की मंजूरी (Sanction) प्राप्त नहीं की गई थी, जिसके कारण इस आपराधिक कार्यवाही को आगे बढ़ाना कानूनन उचित नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागु की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत के आदेश और जारी समन को निरस्त कर दिया। अदालत के निर्णय के प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं:

* **राज्य सरकार की मंजूरी का अभाव:** सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अनिवार्य वैधानिक अनुमति (Sanction) नहीं ली गई थी।
* **मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द:** राज्य सरकार के हलफनामे में अभियोजन की मंजूरी का कोई उल्लेख न होने के आधार पर अदालत ने मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण माना और रद्द कर दिया।
* **आपराधिक कार्यवाही समाप्त:** इस फैसले के बाद राहुल गांधी को इस विशेष शिकायत के सिलसिले में अदालत में पेश होने या आपराधिक मुकदमे का सामना करने से पूर्ण मुक्ति मिल गई है।

 क्या था पूरा विवाद और मामला?

> **मामले की पृष्ठभूमि:** यह विवाद साल 2022 में राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिए गए एक भाषण से जुड़ा हुआ था। यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने वीर सावरकर के अंग्रेजों के साथ पत्राचार और पेंशन का जिक्र करते हुए कुछ टिप्पणियां की थीं।

इस बयान के खिलाफ उत्तर प्रदेश में शिकायतकर्ता द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी की टिप्पणियों से समाज में वैमनस्य फैल सकता है और ऐतिहासिक व्यक्तित्व की छवि को नुकसान पहुंचा है। शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 153A (शत्रुता बढ़ाना) और धारा 505 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत मामला दर्ज कराया गया था।

निचली अदालत (ACJM) ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां से अब उन्हें अंतिम राहत प्राप्त हुई है।

 कानूनी और राजनीतिक मायने

राहुल गांधी के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है:

1. **कानूनी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन:** सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने यह पुनः रेखांकित किया है कि जनप्रतिनिधियों या किसी भी नागरिक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करते समय कानूनी प्रक्रियाओं और वैधानिक स्वीकृतियों का पालन अनिवार्य है।
2. **लगातार अदालती दौरों से राहत:** राजनीतिक भाषणों से जुड़े विभिन्न मानहानि और आपराधिक मामलों का सामना कर रहे राहुल गांधी के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत लेकर आया है।
3. **कांग्रेस के लिए राजनीतिक बढ़त:** संसद में विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे एक प्रमुख मामले का खत्म होना कांग्रेस पार्टी के लिए भी एक बड़ी कानूनी और नैतिक जीत है।

 निष्कर्ष

वीर सावरकर टिप्पणी विवाद में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश राहुल गांधी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी विजय है। अनिवार्य सरकारी मंजूरी न होने के आधार पर दर्ज केस और समन दोनों के निरस्त होने के साथ ही यह कानूनी विवाद अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है।

Read more

Latest News