Sunday, September 6, 2026

संसद में पप्पू यादव का रोष: “पटना पुलिस या ‘आतंकवादी’?” – बिहार पुलिस पर उठाए गंभीर सवाल

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नई दिल्ली / पटना:

देश की राजधानी दिल्ली में संसद सत्र के दौरान उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार पुलिस और विशेष रूप से पटना पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए। संसद परिसर में तख्ती लेकर प्रदर्शन करते हुए पप्पू यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि *”पटना पुलिस आम जनता और छात्रों के साथ आतंकवादी की तरह व्यवहार कर रही है।”* उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया उबाल आ गया है।

संसद परिसर में जोरदार प्रदर्शन

संसद भवन परिसर में हाथों में विरोध की तख्तियां लिए सांसद पप्पू यादव अकेले ही पटना पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ मोर्चा खोले नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की राजधानी में पुलिस प्रशासन का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि आम नागरिक, छात्र और अपराधी में कोई अंतर ही नहीं समझा जा रहा।

पप्पू यादव ने कहा,
“पुलिस का काम कानून-व्यवस्था की रक्षा करना और आम जनता को सुरक्षा महसूस कराना होता है। लेकिन पटना पुलिस जिस तरह से निर्दोष युवाओं, प्रदर्शनकारी छात्रों और आम लोगों पर बर्बरता से लाठियां बरसा रही है और देर रात घरों में घुसकर लोगों को डरा रही है, वह किसी आतंकवादी संगठन के काम करने के तरीके से अलग नहीं है।”

क्यों भड़के सांसद? मामला क्या है?

हाल ही में पटना में विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों और छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और धरपकड़ की घटनाओं को लेकर सांसद काफी आक्रोशित दिखे। पप्पू यादव का कहना है कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले युवाओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें अपराधी की तरह हिरासत में लिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य में संगीन अपराधों पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही पुलिस, सिर्फ लाचार और निहत्थे नागरिकों पर अपनी ताकत दिखाने तक सीमित रह गई है।

बिहार में पुलिसिया राज चरम पर’

संसद परिसर से अपनी बात रखते हुए पप्पू यादव ने राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और ‘सुशासन’ का दावा करने वाली सरकार का पुलिस महकमे पर से नियंत्रण हट चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि निर्दोष जनता पुलिस के खौफ में जीने को मजबूर है।

सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि पटना में हाल ही में हुई पुलिस बर्बरता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों पर तुरंत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

सियासी हलचल और आगे की राह

पप्पू यादव के इस विवादित और बेहद आक्रामक बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष उनके बयान की भाषा पर सवाल उठा रहा है और इसे पुलिस बल का मनोबल गिराने वाला बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की तानाशाही और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक मान रहा है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि संसद परिसर में गूंजे इस मुद्दे के बाद क्या राज्य सरकार पटना पुलिस की कार्यशैली पर कोई कड़ा कदम उठाती है या फिर यह मुद्दा आगामी दिनों में और तूल पकड़ता है।

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