
नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—की कार्यवाही एक बार फिर शुरू होते ही जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गई। विपक्षी सांसदों के लगातार शोर-शराबे और विरोध प्रदर्शन के बीच दोनों सदनों में माहौल काफी गरमा गया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
लोकसभा में चेयर पर आए दिलीप सैकिया
जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, आसन पर भाजपा सांसद दिलीप सैकिया नजर आए। उन्होंने चेयर पर बैठते ही सदन के सदस्यों को अहम जानकारी दी।
दिलीप सैकिया ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने विपक्ष द्वारा दिए गए स्थगन प्रस्ताव के किसी भी नोटिस को स्वीकार करने से मना कर दिया है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी स्थगन प्रस्ताव को अनुमति नहीं दी गई है।
अध्यक्ष के इस फैसले के तुरंत बाद ही विपक्षी सांसद और अधिक आक्रामक हो गए। वे अपनी मांगों को लेकर वेल (Well) में आकर नारेबाजी करने लगे, जिससे सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
राज्यसभा में भी नहीं थमा हंगामा
उधर राज्यसभा में भी हालात कुछ अलग नहीं थे। जैसे ही राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। सभापति द्वारा सांसदों से शांत रहने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की गई, लेकिन विपक्षी सांसद अपनी मांगों पर अड़े रहे।
दोनों ही सदनों में नारेबाजी और तख्तियों के साथ प्रदर्शन देखने को मिला। इसके बावजूद पीठ की ओर से आवश्यक कागजात और पटल पर रखे जाने वाले विषयों को पूरा कराने का प्रयास किया गया।
क्या होता है स्थगन प्रस्ताव?
संसद की कार्यवाही में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है:
उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य किसी तात्कालिक और गंभीर जनहित के मुद्दे पर तुरंत चर्चा कराना होता है।
प्रभाव: यदि स्थगन प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो सदन का सामान्य कामकाज रोककर केवल उसी विशिष्ट मुद्दे पर चर्चा की जाती है।
नियम: चूंकि यह सरकार के सामान्य कामकाज में बाधा डालता है, इसलिए इसे स्वीकार करने का पूर्ण अधिकार केवल अध्यक्ष या सभापति के पास होता है।
इस मामले में स्पीकर द्वारा स्थगन प्रस्ताव खारिज किए जाने को विपक्ष ने अपना हक दबाने का प्रयास बताया, जिससे हंगामा और बढ़ गया।
हंगामे के बीच कार्यवाही जारी रखने की कोशिश
अमूमन भारी हंगामे के बीच सदनों को स्थगित कर दिया जाता है, लेकिन इस बार पीठासीन अधिकारियों ने हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही आवश्यक कार्य निपटाने का प्रयास जारी रखा। हालांकि, लगातार बढ़ते शोर के कारण मंत्रियों और सदस्यों की आवाज स्पष्ट रूप से सुन पाना मुश्किल हो रहा था।
विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष नियम-कायदों को दरकिनार कर केवल राजनीति कर रहा है और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों में बाधा डाल रहा है।
आगे क्या?
संसद में जारी इस गतिरोध को देखकर लगता है कि आने वाले दिनों में भी दोनों सदनों की राह आसान नहीं होगी। यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच किसी समझौते की सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में भी विधायी कार्यों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और विपक्ष मिलकर इस गतिरोध का कोई हल निकाल पाते हैं या फिर संसद का यह सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा।
