होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने दावा किया है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने होर्मुज के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन को मार गिराया है।
ईरान का यह दावा ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव का खतरा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे ईरान का दावा ही माना जा रहा है।
ईरान ने कैसे गिराया अमेरिकी ड्रोन?
ईरानी सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने ट्रैक किया और इसके बाद उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि ड्रोन को मार गिराने के बाद वह समुद्र में जा गिरा।
हालांकि, घटना को लेकर अमेरिका की तरफ से आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि ड्रोन वास्तव में नष्ट हुआ या नहीं और यदि हुआ तो किस स्थान पर हुआ।
क्या है MQ-9 Reaper ड्रोन?
MQ-9 Reaper अमेरिकी सेना का एक बेहद आधुनिक और महत्वपूर्ण मानवरहित विमान है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सैन्य अभियानों में किया जाता है।
यह ड्रोन लंबे समय तक हवा में रह सकता है और दूर बैठे ऑपरेटरों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में यदि ईरान का दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिकी सैन्य क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।
अमेरिका के लिए क्यों बड़ा झटका?
MQ-9 Reaper जैसे अत्याधुनिक ड्रोन को मार गिराने का दावा ईरान के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। इससे तेहरान यह संदेश देने की कोशिश कर सकता है कि उसके पास अमेरिकी सैन्य निगरानी का मुकाबला करने की क्षमता मौजूद है।
अगर अमेरिकी पक्ष ड्रोन के नुकसान की पुष्टि करता है, तो यह सवाल भी उठेगा कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिकी ड्रोन को किस तकनीक के जरिए निशाना बनाया।
हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होगी।
होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी मार्ग से होती है।
यही वजह है कि होर्मुज में किसी भी तरह की सैन्य झड़प का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
अगर इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों को लेकर नई चिंता पैदा हो सकती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे दावे
ईरान की ओर से अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाने के दावे पहले भी सामने आते रहे हैं। तेहरान लगातार यह दिखाने की कोशिश करता रहा है कि वह अपने हवाई क्षेत्र और रणनीतिक इलाकों की निगरानी को लेकर बेहद सतर्क है।
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई बार ड्रोन को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। इसलिए MQ-9 से जुड़ा यह नया दावा दोनों देशों के बीच जारी सैन्य तनाव को और बढ़ा सकता है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया पर टिकी नजर
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका ईरान के इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यदि वॉशिंगटन ड्रोन के गिराए जाने की पुष्टि करता है, तो दोनों देशों के बीच तनाव और गंभीर हो सकता है।
वहीं, अगर अमेरिका इस दावे को खारिज करता है, तो यह मामला सूचना युद्ध का हिस्सा भी बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बयान इस घटनाक्रम को समझने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
बढ़ सकता है वैश्विक असर
होर्मुज में किसी भी सैन्य घटना का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। तेल परिवहन के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग में तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और शिपिंग लागत बढ़ने की आशंका रहती है।
भारत समेत एशिया के कई देश खाड़ी क्षेत्र से आने वाले ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर हैं। इसलिए अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव भारत के लिए भी तेल कीमतों और व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि ईरान का MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा कितना सही है। स्वतंत्र पुष्टि और अमेरिकी आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
लेकिन इतना जरूर है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र बन गया है। यदि सैन्य टकराव आगे बढ़ता है, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

