
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच समुद्री मोर्चे पर अमेरिका ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, ईरान की समुद्री नाकेबंदी को लागू कराने के दौरान अब तक 115 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है। CENTCOM ने 23 सितंबर को बताया कि अमेरिकी सेनाएं ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंधों को सख्ती से लागू कर रही हैं।
अमेरिका इस अभियान को “Steel Wall Blockade” नाम दे रहा है। अमेरिकी दावे के मुताबिक, इस कार्रवाई का मकसद उन जहाजों को रोकना है जो ईरानी बंदरगाहों या तटीय इलाकों से आने-जाने वाले व्यापार में शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि क्षेत्र में होने वाला अन्य कमर्शियल ट्रैफिक पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
115 जहाजों का बदला गया रास्ता
CENTCOM के अनुसार, 23 सितंबर तक अमेरिकी सेनाओं ने कुल 115 कमर्शियल जहाजों को डायवर्ट किया। यह आंकड़ा दो दिन पहले बताए गए आंकड़े से पांच अधिक है। 21 सितंबर को अमेरिकी सेना ने 110 जहाजों को डायवर्ट किए जाने की जानकारी दी थी।
यहां यह समझना जरूरी है कि ‘डायवर्ट’ किए गए जहाजों का मतलब यह नहीं है कि सभी जहाजों को जब्त कर लिया गया या नष्ट किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी कार्रवाई में जहाजों को उनके निर्धारित रास्ते से हटाकर वैकल्पिक मार्ग अपनाने के लिए कहा गया है।
इस कार्रवाई का सीधा असर खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार और शिपिंग गतिविधियों पर पड़ रहा है। जहाजों के रास्ते बदलने से यात्रा का समय बढ़ सकता है और परिवहन, बीमा तथा माल ढुलाई की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
हॉर्मुज में पहले से कम हुआ ट्रैफिक
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर दिखाई दे रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। रॉयटर्स के अनुसार, संघर्ष बढ़ने से पहले यहां रोजाना औसतन करीब 125 बड़े कमर्शियल जहाज गुजरते थे। लेकिन 21 सितंबर के आसपास ट्रैफिक में भारी गिरावट दर्ज की गई।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक दिन केवल दो कमोडिटी जहाजों के हॉर्मुज पार करने का डेटा सामने आया। हालांकि, जहाजों के ट्रैकिंग सिस्टम बंद होने की वजह से वास्तविक संख्या अलग हो सकती है। इसका मतलब है कि उपलब्ध शिप-ट्रैकिंग डेटा पूरे समुद्री ट्रैफिक की तस्वीर नहीं दिखा सकता।
हॉर्मुज की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार होता है। ऐसे में लंबे समय तक समुद्री ट्रैफिक प्रभावित रहने पर तेल की कीमत, शिपिंग लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका की नाकेबंदी का मकसद क्या है?
अमेरिका की ओर से लागू की जा रही मौजूदा समुद्री नाकेबंदी का लक्ष्य ईरान के समुद्री व्यापार को सीमित करना है। CENTCOM के अनुसार, कार्रवाई मुख्य रूप से उन जहाजों पर केंद्रित है जो ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले व्यापार में शामिल हैं।
अमेरिकी सैन्य अभियान का यह चरण ऐसे समय में चल रहा है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच राजनीतिक तनाव भी बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत की खबरें सामने आई हैं, लेकिन समुद्री नाकेबंदी को लेकर दोनों देशों की स्थिति अभी भी अलग है।
ईरान की ओर से लगातार कहा गया है कि अमेरिका को सैन्य दबाव और नाकेबंदी कम करनी चाहिए। रॉयटर्स के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और नाकेबंदी हटाता है तो ईरान हॉर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार है।
शिपिंग कंपनियों की बढ़ी मुश्किलें
समुद्री मार्ग में बदलाव का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। खाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए रास्ता बदलने का मतलब अधिक समय, अतिरिक्त ईंधन और ज्यादा परिचालन लागत हो सकता है।
इसके अलावा, युद्ध क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए War Risk Insurance का खर्च भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है। समुद्री सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं।
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है। खासकर तेल, गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने पर एशिया और यूरोप के बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईरान पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी का एक बड़ा उद्देश्य ईरान के व्यापार और ऊर्जा निर्यात पर दबाव बढ़ाना भी है। समुद्री रास्तों पर प्रतिबंधों के चलते ईरान को अपने व्यापार के लिए वैकल्पिक मार्गों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ रहा है।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी समुद्री दबाव से बचने के लिए अपने व्यापार का एक हिस्सा समुद्री मार्गों से हटाकर भूमि मार्गों की ओर मोड़ना शुरू किया है। तुर्की के रास्ते माल परिवहन में बढ़ोतरी इसका एक उदाहरण है। हालांकि, इन वैकल्पिक रास्तों में भी लंबी कस्टम प्रक्रिया और ज्यादा लॉजिस्टिक लागत जैसी चुनौतियां हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका की Steel Wall Blockade कितने समय तक जारी रहती है और इसका ईरान-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ता है। एक तरफ अमेरिकी सेनाएं समुद्री नाकेबंदी को सख्ती से लागू करने की बात कह रही हैं, तो दूसरी तरफ ईरान हॉर्मुज को दोबारा खोलने की संभावना को अमेरिका के सैन्य दबाव कम करने से जोड़ रहा है।
फिलहाल 115 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला जाना इस बात का संकेत है कि समुद्री तनाव काफी बढ़ चुका है। अगर नाकेबंदी और हॉर्मुज में कम ट्रैफिक की स्थिति लंबे समय तक रहती है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित न रहकर वैश्विक तेल और शिपिंग बाजारों तक पहुंच सकता है।
आने वाले दिनों में अमेरिका की समुद्री कार्रवाई, ईरान की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत यह तय करेगी कि हॉर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है या तनाव और बढ़ता है।
