Tuesday, November 3, 2026

ईरान युद्ध में अमेरिका बहुत जल्द जीतेगा : ट्रंप

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ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने 28 सितंबर को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ चल रहे युद्ध में “बहुत जल्द” जीत हासिल करेगा। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि युद्ध किसी भी तरह अमेरिका के पक्ष में खत्म होगा और यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म करने के लिए मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने सोमवार को उन मध्यस्थों से बातचीत की, जो दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने की कोशिश कर रहे हैं।

‘बहुत जल्द जीतेंगे’ बोले ट्रंप

ओवल ऑफिस में ट्रंप से जब ईरान के साथ जारी युद्ध और उसके संभावित अंत को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द जीत हासिल करेगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की ओर से मध्यस्थों के साथ संपर्क किया गया है। हालांकि उन्होंने बातचीत की विस्तृत शर्तों या किसी संभावित समझौते का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया। उनके बयान से यह संकेत जरूर मिला कि अमेरिकी प्रशासन सैन्य दबाव के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्पों पर भी नजर बनाए हुए है।

गैस की कीमतों पर भी ट्रंप का दावा

ट्रंप ने युद्ध खत्म होने के बाद गैस की कीमतों में गिरावट की भी बात कही। उन्होंने कहा कि जब युद्ध समाप्त होगा तो ऊर्जा बाजार में राहत देखने को मिल सकती है और गैस की कीमतें नीचे आ सकती हैं।

ईरान के साथ संघर्ष का असर पहले से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की स्थिति पर दुनिया की नजर है।

हॉर्मुज से होकर बड़ी मात्रा में तेल और LNG का परिवहन होता है। अगर इस मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में ट्रंप का गैस कीमतों में कमी का दावा युद्ध के संभावित आर्थिक असर से भी जुड़ा हुआ है।

बातचीत के रास्ते भी खुले

ट्रंप के बयान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बावजूद मध्यस्थों के जरिए बातचीत की कोशिश जारी है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने अलग-अलग माध्यमों से मध्यस्थों के साथ संपर्क किया है और बातचीत का उद्देश्य युद्ध को समाप्त करने के संभावित रास्ते तलाशना है।

मध्यस्थों के जरिए होने वाली बातचीत में ईरान की ओर से पहले रखे गए सात दिन के प्रस्ताव में कुछ शर्तों के साथ तनाव कम करने और हॉर्मुज में समुद्री आवाजाही बहाल करने का मुद्दा शामिल था। बाद की रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका को इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने के लिए कूटनीतिक चैनल का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इसलिए ट्रंप के “बहुत जल्द जीत” वाले बयान को किसी औपचारिक युद्धविराम या अंतिम समझौते की घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

ईरान का रुख भी सख्त

दूसरी तरफ ईरान की ओर से भी अमेरिका के खिलाफ सख्त बयान सामने आ रहे हैं। 27 सितंबर को ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा था कि उनकी सेना संभावित नए अमेरिकी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। ईरान ने हॉर्मुज और अपने समुद्री क्षेत्र को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है।

28 सितंबर को ईरान के सर्वोच्च नेता से जुड़े बयान में विदेशी सैन्य बलों को अरब सागर से बाहर जाने की चेतावनी भी सामने आई। यह घटनाक्रम बताता है कि सैन्य तनाव के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में भी टकराव की स्थिति बनी हुई है।

भारत समेत दुनिया पर असर

अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसलिए युद्ध लंबा चलने पर कच्चे तेल की कीमत, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। पश्चिम एशिया से आने वाले तेल के समुद्री मार्गों में किसी भी बड़े व्यवधान से आयात लागत बढ़ सकती है।

हालांकि, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव केवल युद्ध की स्थिति पर निर्भर नहीं करता। वैश्विक मांग, उत्पादन, वैकल्पिक आपूर्ति और समुद्री मार्गों की स्थिति भी इसकी दिशा तय करती है।

हॉर्मुज पर बनी हुई है नजर

इस संघर्ष में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज सबसे अहम रणनीतिक क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के दौरान हॉर्मुज में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। समुद्री यातायात में कमी का सीधा असर तेल और अन्य वस्तुओं की वैश्विक सप्लाई पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में बहुत जल्द जीत हासिल करेगा, लेकिन दूसरी ओर बातचीत के प्रयास भी जारी हैं और ईरान ने संघर्ष जारी रहने की स्थिति में जवाब देने की तैयारी का संकेत दिया है।

इसलिए आने वाले दिनों में तीन चीजों पर खास नजर रहेगी—अमेरिका-ईरान बातचीत, हॉर्मुज में समुद्री आवाजाही और दोनों पक्षों की सैन्य गतिविधियां। यदि मध्यस्थों के जरिए कोई समझौता आगे बढ़ता है तो तनाव कम हो सकता है। वहीं अगर बातचीत विफल होती है और सैन्य कार्रवाई बढ़ती है, तो क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर इसका आर्थिक असर और गहरा हो सकता है।

फिलहाल ट्रंप का बयान अमेरिकी प्रशासन के आत्मविश्वास को दर्शाता है, जबकि ईरान की ओर से लगातार आ रहे बयानों से पता चलता है कि संघर्ष पूरी तरह खत्म होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास इस संकट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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