Saturday, September 5, 2026

“एंटी पेपर लीक बिल केवल एक दिखावा”: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई का केंद्र पर निशाना

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नई दिल्ली: संसद के हालिया सत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को रोकने के उद्देश्य से लाए गए नए विधेयक (Anti-Paper Leak Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कानून की मंशा और इसकी प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए इस विधेयक को “महज एक दिखावा” और “आंखों में धूल झोंकने वाला कदम” करार दिया है।

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़: गौरव गोगोई
संसद भवन परिसर में पत्रकारों और जनसभा को संबोधित करते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि देश भर के लाखों छात्र और अभ्यर्थी सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले या बाद में पेपर लीक होने के कारण उनका भविष्य अंधकार में लटक जाता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाया गया यह नया कानून मूल समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल एक प्रचार माध्यम बनकर रह गया है। गोगोई के अनुसार, सरकार सख्त कानून बनाने का दावा कर रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर मुख्य साजिशकर्ताओं और बड़े रैकेट चलाने वालों पर कोई कड़ा शिकंजा कसने का प्रावधान इसमें स्पष्ट नहीं दिखता।

कांग्रेस सांसद का बयान:

“यह एंटी पेपर लीक बिल केवल एक दिखावा है। सरकार युवाओं के गुस्से को शांत करने के लिए जल्दबाज़ी में यह कागज़ी ढाल लेकर आई है। जब तक परीक्षाओं का संचालन करने वाली मुख्य एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और बड़े तंत्र पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे सख्त दिखने वाले कानूनों से कोई वास्तविक बदलाव नहीं आने वाला।” — गौरव गोगोई, सांसद (कांग्रेस)

कांग्रेस द्वारा उठाए गए 3 प्रमुख सवाल
गौरव गोगोई ने इस विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए सरकार के सामने मुख्य रूप से तीन बड़े सवाल रखे:

एजेंसियों की जवाबदेही का अभाव: क्या यह बिल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) या अन्य राज्य स्तरीय परीक्षा बोर्डों के शीर्ष अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करता है?

छोटे मोहरों पर कार्रवाई बनाम मुख्य मास्टरमाइंड: बिल में केवल परीक्षार्थियों और छोटे बिचौलियों पर दंडात्मक कार्रवाई की बात की गई है, जबकि पेपर लीक के पीछे सक्रिय बड़े सिंडिकेट और कोचिंग माफिया पर स्पष्ट रुख का अभाव है।

पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए मुआवजा और समयबद्धता: जिस परीक्षा का पेपर लीक होता है, उसके अभ्यर्थियों को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान की भरपाई और दोबारा परीक्षा की समयबद्ध गारंटी का बिल में कोई ठोस खाका नहीं है।

बैकग्राउंड: देशभर में पेपर लीक का बढ़ता विवाद
हाल के महीनों में नीट (NEET), यूजीसी-नेट (UGC-NET) समेत कई राज्यों की पुलिस भर्ती और शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के पर्चे लीक होने के बाद देशभर में छात्रों और छात्र संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किए थे। सरकार ने इस दबाव के बीच परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दोषियों को भारी जुर्माना व जेल की सजा का प्रावधान करने के लिए यह एंटी पेपर लीक कानून पेश किया था।

आगे की राह और छात्र आंदोलनों का रुख
गौरव गोगोई ने सरकार से मांग की है कि इस विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिए संसदीय समिति (Parliamentary Committee) के पास भेजा जाना चाहिए था ताकि इसमें छात्रों, शिक्षकों और कानूनी विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल किया जा सके।

कांग्रेस नेता के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि संसद से लेकर सड़कों तक पेपर लीक का मुद्दा फिलहाल ठंडा होने वाला नहीं है। विपक्ष इस मुद्दे को युवाओं के रोजगार और भविष्य से जोड़कर सरकार को लगातार घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

निष्कर्ष
प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बहाल करना देश के करोड़ों युवाओं के भरोसे का सवाल है। एक तरफ जहां सरकार इस बिल को ऐतिहासिक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल—विशेषकर परीक्षा एजेंसियों की आंतरिक जवाबदेही और पारदर्शी जांच प्रणाली—ऐसे बिंदु हैं जिन पर सरकार को ठोस जवाब देने की जरूरत है।

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