Sunday, September 6, 2026

ट्रम्प की ओमान को बमबारी की धमकी: ईरान मुद्दे पर दखल न देने की चेतावनी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान ईरान के साथ बातचीत या समझौते के जरिए अमेरिकी प्रयासों के बीच आता है, तो अमेरिका उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और ओमान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री आवाजाही को लेकर बातचीत कर रहे हैं।
ट्रम्प की धमकी के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। मौजूदा संकट में भी मस्कट ईरान के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत कर रहा है। ट्रम्प को आशंका है कि ओमान की कोई ऐसी पहल अमेरिकी रणनीति में बाधा बन सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ा मुद्दा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक समुद्री तेल और LNG व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलमार्ग मौजूदा अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण लंबे समय से गंभीर दबाव में है।

25 अगस्त को ईरान और ओमान ने इस जलमार्ग में अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाने और बारूदी सुरंगों को हटाने पर बातचीत आगे बढ़ाई। दोनों देशों की कोशिश है कि सुरक्षित तरीके से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही शुरू हो सके। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

IRGC से बातचीत के दावे पर विवाद

ट्रम्प ने अपने बयान में यह भी दावा किया था कि अमेरिकी प्रशासन और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच सीधे बैक-चैनल संपर्क हैं। हालांकि, IRGC की ओर से इस दावे को खारिज किया गया। संगठन के एक प्रवक्ता ने कहा कि IRGC अधिकारियों और अमेरिका के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है और ट्रम्प का दावा गलत है।

यह विरोधाभास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अलग-अलग स्तरों पर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। इससे पहले भी ओमान ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अमेरिका-ईरान तनाव बरकरार

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष का सबसे बड़ा मुद्दा परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति है। ट्रम्प लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, ईरान अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों का विरोध कर रहा है।

हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हैं, लेकिन भरोसे की कमी के कारण स्थिति बेहद नाजुक है। ईरान और ओमान के बीच समुद्री कॉरिडोर को लेकर हुई प्रगति से तनाव कम होने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अमेरिका की सख्त चेतावनियां बताती हैं कि संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।

आगे क्या होगा?

ओमान के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील है। एक तरफ वह अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ उसके कूटनीतिक संबंध हैं। ऐसे में मस्कट दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री आवाजाही को लेकर ईरान और ओमान की बातचीत किस दिशा में जाती है। अगर अस्थायी कॉरिडोर पर सहमति बनती है, तो इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा तो खाड़ी क्षेत्र में स्थिति दोबारा गंभीर हो सकती है।

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