Sunday, September 6, 2026

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: कांग्रेस समर्थन को तैयार, भूपेंद्र हुड्डा ने रखी यह बड़ी शर्त

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: कांग्रेस समर्थन को तैयार, भूपेंद्र हुड्डा ने रखी यह बड़ी शर्त

हरियाणा की राजनीति में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष विधानसभा सत्र के दौरान कांग्रेस ने जोरदार विरोध जताते हुए सदन का बहिष्कार (बायकॉट) किया। इसके बाद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष [भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस का स्टैंड साफ किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके लिए सरकार को एक अहम शर्त माननी होगी।

भूपेंद्र हुड्डा ने क्या रखी शर्त?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भूपेंद्र हुड्डा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण की कभी विरोधी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में संसद द्वारा 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है।

कांग्रेस की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

तत्काल प्रभाव से लागू हो आरक्षण :  हुड्डा ने कहा कि यदि भाजपा सरकार वाकई महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर है, तो इस कानून को परिसीमन और जनगणना के नाम पर टालने के बजाय तुरंत (Immediate Effect) लागू किया जाए।
आगामी चुनावों में 33% आरक्षण: कांग्रेस का कहना है कि आगामी चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का लाभ अभी से मिलना शुरू होना चाहिए।
सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting): हुड्डा के अनुसार, यदि सरकार इसमें कोई नई व्यवस्था या प्रस्ताव लाना चाहती थी, तो पहले सभी राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाकर विचार-विमर्श करना चाहिए था।

विधानसभा सत्र का बहिष्कार और ‘समानांतर सदन’

विशेष सत्र के दौरान हरियाणा विधानसभा के भीतर और बाहर अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला:

सदन का बहिष्कार: कांग्रेस विधायकों ने नायब सैनी सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव का यह कहते हुए बहिष्कार किया कि राज्य विधानसभा को केंद्र के क्षेत्राधिकार वाले मुद्दों पर केवल राजनीतिक प्रचार का अड्डा नहीं बनाया जाना चाहिए।
बाहर चलाया ‘समानांतर सदन’: सदन की कार्यवाही का बायकॉट करने के बाद कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर अपना समानांतर (Parallel) सदन चलाया, जहां उन्होंने राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की।
जनता के पैसे का दुरुपयोग: भूपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा सत्र पर जनता के पैसों का इस्तेमाल सिर्फ अपने प्रचार के लिए कर रही है।

भाजपा और मुख्यमंत्री नायब सैनी का पलटवार

कांग्रेस के बहिष्कार और समानांतर सदन चलाने पर हरियाणा के मुख्यमंत्री [नायब सिंह सैनी] ने तीखा हमला बोला:

विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव: कांग्रेस के बायकॉट के बाद विधानसभा में विपक्ष के खिलाफ सर्वसम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।
‘पार्किंग में लड़ रहे’:मुख्यमंत्री सैनी ने तंज कसते हुए कहा कि “जिनके टायर पंचर हो जाते हैं, वे अक्सर पार्किंग में ही खड़े मिलते हैं। जिन्हें जनता ने विधानसभा में बहस के लिए भेजा था, वे बाहर परछाइयों से लड़ रहे हैं।”
संकीर्ण सोच का आरोप: सत्तापक्ष ने तर्क दिया कि यह सत्र नारी शक्ति के सम्मान के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन विपक्ष ने इसका बहिष्कार करके अपनी महिला विरोधी मानसिकता का परिचय दिया है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर टकराव का राजनीतिक मायने

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छिड़ी हुई है।

हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा का यह बयान कांग्रेस के उस राष्ट्रीय रुख को भी दोहराता है जिसमें महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त या लंबी समयसीमा के तुरंत लागू करने की मांग की जा रही है। हुड्डा का कहना है कि सरकार यदि नीयत साफ रखती है, तो महिलाओं को उनका हक देने के लिए 2029 तक का इंतजार कराने का कोई औचित्य नहीं है।

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