Saturday, September 5, 2026

नेपाल बाढ़: मौतों का आंकड़ा 962 पार, त्रिशूली प्रोजेक्ट के 118 कामगार लापता

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नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं और मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 962 तक पहुंच गया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। खास चिंता हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले उन कर्मचारियों और मजदूरों को लेकर है, जिनसे बाढ़ के बाद संपर्क नहीं हो पाया है।

त्रिशूली नदी और उसके आसपास का इलाका इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यहां बाढ़ का पानी, मलबा और चट्टानें कई जगहों पर घुस गईं, जिससे सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाओं का बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

त्रिशूली प्रोजेक्ट के 118 कामगारों से संपर्क टूटा

इस आपदा के बीच त्रिशूली-3बी जलविद्युत परियोजना से जुड़ी चिंता लगातार बढ़ रही है। रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना में काम करने वाले 118 कर्मचारी और कामगार अब भी संपर्क से बाहर हैं।

हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है और बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़े लगातार बदल रहे हैं। Upper Trishuli-3B से जुड़ी एक स्थानीय रिपोर्ट में 198 लोगों के अब भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई थी, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में अलग संख्या सामने आई है। ऐसे में अंतिम आंकड़ा आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बने रेस्क्यू ऑपरेशन का केंद्र

नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आई हैं। कई परियोजनाओं की सुरंगों में मलबा भर गया है और कुछ जगहों पर पानी तथा कीचड़ के कारण बचाव दलों के लिए अंदर पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक कई परियोजनाओं में सैकड़ों कर्मचारी लापता हैं। बचाव दल सुरंगों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनरी, ड्रिलिंग उपकरण और अन्य तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर सुरंगों के अंदर ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिश भी की जा रही है, ताकि अगर कोई व्यक्ति अंदर फंसा हो तो उसके बचने की संभावना बनी रहे।

हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ रही चुनौती

रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबा और खराब मौसम है। बाढ़ के कारण कई सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे प्रभावित इलाकों तक राहत और बचाव दलों को पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।

नेपाल की सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। कई इलाकों में हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। भारत और चीन समेत अन्य देशों की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंगों में फंसे लोगों के लिए ऑक्सीजन, पानी और भोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय तक मलबे के बीच फंसे रहने से उनके सामने गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। इसी वजह से बचाव दलों पर जल्द से जल्द सुरंगों तक पहुंचने का दबाव है।

कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

रिपोर्टों के मुताबिक यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में हुए ग्लेशियर और चट्टानी मलबे के खिसकने के बाद शुरू हुई। इससे नदियों में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंच गया, जिसने निचले इलाकों में विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया।

तेज बहाव के साथ आई मिट्टी, चट्टानों और पानी ने रास्ते में आने वाली इमारतों, पुलों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया। इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते जलवायु और ग्लेशियर जोखिम को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

हजारों लोग अब भी लापता

मौतों के बढ़ते आंकड़े के साथ सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों को लेकर है। नेपाल और तिब्बत में हजारों लोगों के अब भी लापता होने की खबरें सामने आई हैं। कई परिवार अपने रिश्तेदारों की तलाश में अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।

हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों के अलावा स्थानीय ग्रामीण और दूसरे लोग भी बाढ़ के बाद से संपर्क में नहीं हैं। प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक पहुंचकर लोगों की पहचान और आंकड़ों की पुष्टि की जाए।

भारत समेत कई देशों से मदद

नेपाल के राहत अभियान में अंतरराष्ट्रीय मदद भी पहुंच रही है। भारत ने सुरंगों में बचाव के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों और मेडिकल टीमों की मदद भेजी है। इसके अलावा राहत सामग्री, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

चीन की ओर से भी प्रभावित सीमा क्षेत्रों में राहत और पुनर्निर्माण कार्य जारी है। कई जगहों पर सड़क और पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।

परिवारों की उम्मीदें बचाव अभियान पर टिकीं

लापता लोगों के परिवारों के लिए यह समय बेहद मुश्किल है। उन्हें अब भी उम्मीद है कि सुरंगों या मलबे में फंसे उनके परिजन जिंदा मिल सकते हैं। बचाव दल भी हर संभावित स्थान पर खोज अभियान चला रहे हैं।

हालांकि, अधिकारियों के अनुसार अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संपर्क से बाहर बताए जा रहे कितने लोग सुरंगों में फंसे हैं और कितने लोग बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। यही वजह है कि प्रशासन लगातार आंकड़ों को अपडेट कर रहा है।

अब राहत और बचाव अभियान पर नजर

नेपाल में फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है। 962 मौतों का आंकड़ा इस आपदा की भयावहता को दिखाता है, लेकिन वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।

त्रिशूली परियोजना के 118 कामगारों से संपर्क न होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। आने वाले घंटों में बचाव दल अगर सुरंगों और मलबे तक पहुंचने में कामयाब होते हैं, तो कई परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी मिल सकती है।

फिलहाल नेपाल में हर गुजरते घंटे के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। प्रशासन, सेना और अंतरराष्ट्रीय राहत टीमों की कोशिश यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और इस भीषण आपदा के बाद प्रभावित परिवारों तक जल्द राहत पहुंचाई जा सके।

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