Saturday, September 5, 2026

पप्पू यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, केंद्र को मिला अतिरिक्त PSO देने का निर्देश

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नई दिल्ली:बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों के बीच अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि पप्पू यादव की सुरक्षा के लिए अस्थायी रूप से एक अतिरिक्त पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) तुरंत तैनात किया जाए।

‘धमकियों को मनगढ़ंत नहीं माना जा सकता’ — HC की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी जनप्रतिनिधि को लगातार मिल रही धमकियों और सुरक्षा चिंताओं को हलके में नहीं लिया जा सकता। पीठ ने टिप्पणी की कि जब तक सुरक्षा समीक्षा की पूरी प्रक्रिया संपन्न नहीं हो जाती और याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक सांसद को संभावित खतरों से सुरक्षा प्रदान करना जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने अंतरिम उपाय के तौर पर तुरंत अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात करने का हुक्म सुनाया।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग से धमकी का दावा

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि उन्हें कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग तथा अन्य आपराधिक तत्वों से वॉट्सऐप, फोन कॉल और सोशल मीडिया के जरिए लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने अदालत से अपनी सुरक्षा बढ़ाकर ‘Y+’ या ‘Z’ श्रेणी करने का आग्रह किया था।

 बाबा सिद्दीकी मामले के बाद बढ़ा विवाद

पप्पू यादव की सुरक्षा का मुद्दा पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में रहा है। मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद पप्पू यादव ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ कड़ा बयान दिया था। उन्होंने दावा किया था कि अगर कानून इजाजत दे, तो वह इस आपराधिक नेटवर्क को 24 घंटे में खत्म कर सकते हैं। इस बयान के बाद उन्हें कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों की ओर से धमकियां मिलने का सिलसिला शुरू हो गया था।

 गृह मंत्रालय को लिखा था पत्र

अदालत का रुख करने से पहले पप्पू यादव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और बिहार सरकार को पत्र लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया था कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें लगातार जनसंपर्क में रहना पड़ता है और बिहार से लेकर दिल्ली तक यात्राएं करनी पड़ती हैं। पुख्ता सुरक्षा न होने के कारण उनकी जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।

 अदालत का अंतरिम आदेश और आगे की राह

केंद्र सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि सुरक्षा श्रेणी का निर्धारण केंद्रीय एजेंसियों की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट (Threat Perception Assessment) के आधार पर किया जाता है। हालांकि, कोर्ट ने स्थिति की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत जारी की।

दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब संबंधित सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन को पप्पू यादव के साथ अतिरिक्त PSO तैनात करना होगा। अदालत मामले की अगली सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय द्वारा सौंपी जाने वाली विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।

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