Tuesday, November 3, 2026

बंगाल में EC के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन! ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग

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बंगाल में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन शुक्रवार, 25 सितंबर को कोलकाता में देखने को मिला। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ मार्च निकाला और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई।

कांग्रेस का यह प्रदर्शन देशभर में चल रहे उसके विरोध कार्यक्रम का हिस्सा है। पार्टी ने 25 सितंबर को अलग-अलग राज्यों में राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का आह्वान किया था। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कोलकाता में सड़क पर उतरे कांग्रेस कार्यकर्ता

कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने CEO कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान कांग्रेस की ओर से ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

कांग्रेस ने इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि उनके कार्यकाल के दौरान मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी अपने विरोध अभियान में शामिल की है।

SIR को लेकर कांग्रेस के सवाल

कांग्रेस के विरोध का एक प्रमुख मुद्दा Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा है। पार्टी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े बदलावों को अपनी निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए नामों को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें भी दाखिल हुई हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22 लाख से ज्यादा ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच राजनीतिक और कानूनी बहस लगातार जारी है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी बदलाव की प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और जांच के योग्य होनी चाहिए।

विपक्ष की ओर से भी उठ रहे सवाल

ज्ञानेश कुमार को लेकर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी समूहों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। हाल के दिनों में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज, SIR और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

इसी बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कुछ महीनों में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को अपनी सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि अलग-अलग विचार संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा होते हैं।

वहीं, ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने को लेकर विपक्षी सांसदों की ओर से संसद में प्रस्ताव लाने की चर्चा भी सामने आई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग है और इसके लिए संसद में निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होता है।

बंगाल में चुनावी माहौल के बीच बढ़ी हलचल

पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति के बीच EC और SIR का मुद्दा लगातार चर्चा में है। ऐसे समय में कांग्रेस का कोलकाता में प्रदर्शन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप पार्टी के राजनीतिक दावे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं और निर्णयों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

कांग्रेस का कहना है कि वह मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई, उन्हें पद से हटाने और उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए चुनावी फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।

कोलकाता का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद, अदालत और चुनावी राजनीति—तीनों स्तरों पर आगे बढ़ सकता है।

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