Wednesday, November 4, 2026

भारत आएंगे ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान! BRICS समिट में PM मोदी से होगी मुलाकात

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भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता शामिल होंगे। इसी कड़ी में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी भारत पहुंचेंगे। उनके दौरे को भारत और ईरान के बीच रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

पेजेश्कियान के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी अहम मुलाकात होने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इससे पहले दोनों नेता अगस्त में किर्गिस्तान में SCO Summit के दौरान मुलाकात कर चुके हैं।

BRICS समिट में शामिल होंगे पेजेश्कियान

ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दा बना हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव तथा क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है।

ऐसे माहौल में BRICS का मंच ईरान के लिए अपनी स्थिति रखने और सदस्य देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। ईरान अब BRICS का सदस्य है और भारत इस संगठन के साथ बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर लगातार जोर देता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त में SCO Summit के दौरान पेजेश्कियान से मुलाकात के बाद कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे बहुपक्षीय संगठनों में ईरान के साथ करीबी सहयोग के लिए तैयार है। उन्होंने पेजेश्कियान को BRICS Summit के लिए भारत आने का स्वागत करने की बात भी कही थी।

PM मोदी और पेजेश्कियान के बीच होगी अहम बातचीत

पेजेश्कियान के भारत दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई मौकों पर बातचीत हो चुकी है। अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS Summit के दौरान भी मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों और चाबहार पोर्ट समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की थी।

इस बार की बैठक का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि दोनों देशों के सामने पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे हैं।

भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। अगस्त में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात के दौरान भी पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति एवं स्थिरता कायम करने की जरूरत पर जोर दिया था।

चाबहार पोर्ट और व्यापार पर भी नजर

भारत और ईरान के रिश्तों में चाबहार पोर्ट बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह बंदरगाह भारत को ईरान के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच देने में मदद करता है।

दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए चाबहार को रणनीतिक परियोजना माना जाता है। 2024 में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात के दौरान भी चाबहार पोर्ट के महत्व पर चर्चा हुई थी।

ऐसे में BRICS Summit के दौरान होने वाली संभावित द्विपक्षीय बैठक में इस परियोजना के साथ-साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत हो सकती है।

पश्चिम एशिया संकट भी रहेगा अहम मुद्दा

ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से जुड़ा है।

मोदी और पेजेश्कियान की पिछली बैठक में भी क्षेत्रीय तनाव, नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। भारत ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए तथा समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता सुरक्षित रहनी चाहिए।

BRICS Summit में पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के बीच चर्चा होने की संभावना भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

भारत-ईरान रिश्तों के लिए क्यों खास है दौरा?

पेजेश्कियान का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। दोनों देश व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में अपने रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश करते रहे हैं।

ईरान की ओर से भी हाल में भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख सामने आया है। BRICS Summit से पहले ईरानी पक्ष ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए रिश्तों को और मजबूत करने की उम्मीद जताई है।

BRICS के मंच पर भारत की कूटनीतिक भूमिका

इस बार BRICS Summit में कई बड़े वैश्विक नेता शामिल होने वाले हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत कई नेताओं की मौजूदगी इस सम्मेलन को बेहद महत्वपूर्ण बना रही है।

भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय कूटनीति को मजबूत करने का अवसर भी है। नई दिल्ली एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ रूस, ईरान और चीन जैसे देशों के साथ भी संवाद बनाए हुए है।

ऐसे में मोदी और पेजेश्कियान की मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पर भी दिखाई दे सकता है।

कुल मिलाकर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का भारत दौरा BRICS Summit की अहम घटनाओं में से एक रहने वाला है। PM मोदी के साथ उनकी संभावित बैठक में भारत-ईरान संबंधों, चाबहार पोर्ट, व्यापार, ऊर्जा और पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, दोनों नेताओं की मुलाकात पर भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर रहेगी।

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