Sunday, September 6, 2026

राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को हटाने की मांग: SC के जज ने CJI सूर्यकांत को लिखे लेटर, लगाए गंभीर आरोप

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नई दिल्ली:
न्यायपालिका से जुड़ा एक बड़ा और असाधारण मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को कई गोपनीय पत्र लिखकर राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice) जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस मेहता ने कॉलेजियम से जस्टिस शर्मा को तत्काल राजस्थान से बाहर स्थानांतरित करने और राज्य में किसी अन्य उच्च न्यायालय से नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह किया है।

2, 10 और 17 अगस्त को लिखे गए इन पत्रों में प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग, मुकदमों की लिस्टिंग में हेरफेर और पक्षपात जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

पत्रों में लगाए गए प्रमुख आरोप:

रोस्टर और केस लिस्टिंग में हेरफेर: जस्टिस मेहता का आरोप है कि ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ की शक्तियों का उपयोग कर अन्य पीठों से महत्वपूर्ण मामलों को वापस लेकर खुद अपनी बेंच के सामने सूचीबद्ध कराया गया।
उदयपुर जमीन विवाद: उदयपुर की बेशकीमती जमीनों से जुड़े मामलों को जोधपुर प्रधान पीठ के अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाकर जयपुर में अपनी बेंच के सामने लिस्ट करने का आरोप लगाया गया।
साथी जजों और न्यायिक अधिकारियों पर दबाव: पत्र के अनुसार, राजस्थान के कई मौजूदा जजों ने जस्टिस शर्मा के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी। इसमें जिला न्यायपालिका के अधिकारियों और साथी जजों के प्रति प्रतिशोधात्मक रवैया अपनाने का जिक्र है।
अदालत भवन उद्घाटन में देरी:आरोप है कि प्रशासनिक मतभेदों के चलते जोधपुर में नवनिर्मित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट (मेट्रो) भवन के उद्घाटन को अटकाया गया।
नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद की शिकायत: लोक अदालतों में करीबी लोगों की नियुक्तियों और चुनिंदा अधिवक्ताओं को लाभ पहुंचाने के प्रयासों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में शिकायतें भेजी गई हैं।

‘संस्थान के हित के खिलाफ लगातार अनदेखी’

जस्टिस संदीप मेहता (जो खुद मूल रूप से राजस्थान हाईकोर्ट से आते हैं) ने लिखा कि जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ स्पष्ट सबूतों और शिकायतों के बावजूद उन्हें स्थायी मुख्य न्यायाधीश बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते कार्रवाई न करना न्यायिक संस्थान के हित के पूरी तरह खिलाफ होगा और इससे न्यायपालिका की साख को नुकसान पहुंच सकता है।

इन पत्रों की प्रतियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अन्य वरिष्ठ सदस्यों को भी भेजी गई हैं।

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