FIR के विरोध में सड़कों पर उतरी कांग्रेस
उत्तराखंड की राजनीति में राहुल गांधी पर FIR के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस FIR के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार को देहरादून में सचिवालय मार्च शुरू कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज किया गया मामला राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है और इसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।
कांग्रेस कार्यकर्ता और पार्टी के नेता बड़ी संख्या में मार्च में शामिल हुए हैं। पार्टी की ओर से इस प्रदर्शन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी ने हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए थे और इसी के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज करना उचित नहीं है।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद से जुड़ा मामला
दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद हुई। 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
कांग्रेस का आरोप है कि खरगे दलित समुदाय से आते हैं और उनके कार्यक्रम स्थल का इस तरह ‘शुद्धिकरण’ किया जाना अपमानजनक है। पार्टी ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी।
वहीं, दूसरी ओर कार्यक्रम के आयोजकों की तरफ से इसे धार्मिक स्थल की सफाई और शुद्धता से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया बताया गया और जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार किया गया।
राहुल गांधी के खिलाफ क्यों दर्ज हुई FIR?
राहुल गांधी ने इस विवाद को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की। रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने कथित तौर पर आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाए और उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें समुदायों के बीच दुश्मनी बढ़ाने और धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने से संबंधित प्रावधान शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, FIR दर्ज होना किसी आरोप को साबित नहीं करता। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
कांग्रेस ने बताया राजनीतिक कार्रवाई
कांग्रेस ने FIR को लेकर बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी लगातार सामाजिक न्याय, दलित अधिकार और संविधान से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ FIR दर्ज करना विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है।
कांग्रेस का कहना है कि अगर हल्द्वानी में किसी व्यक्ति या संगठन ने ऐसा काम किया जिससे किसी समुदाय की भावनाएं आहत हुईं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पार्टी का सवाल है कि शिकायत करने और घटना पर सवाल उठाने वाले राहुल गांधी के खिलाफ ही मामला क्यों दर्ज किया गया।
देहरादून मार्च में क्या है कांग्रेस की मांग?
कांग्रेस के इस सचिवालय मार्च का मुख्य उद्देश्य राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को वापस लेने की मांग करना है। पार्टी इसके साथ ही हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर भी कार्रवाई की मांग कर रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय तक भी मार्च किया और उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने
इस पूरे विवाद ने कांग्रेस बनाम बीजेपी की राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय का मुद्दा बता रही है, वहीं बीजेपी की ओर से राहुल गांधी पर जातिगत राजनीति करने के आरोप लगाए गए हैं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम आयोजित करने वाले लोग बीजेपी से जुड़े नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि हल्द्वानी की घटना के दौरान धार्मिक नारे लगाए गए थे।
इस तरह दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और विवाद लगातार राजनीतिक रूप लेता जा रहा है।
आंदोलन आगे बढ़ाने की तैयारी
कांग्रेस के लिए यह मुद्दा केवल राहुल गांधी तक सीमित नहीं है। पार्टी इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़कर देख रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी इस मामले को राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठाएगी।
दूसरी तरफ, बीजेपी का कहना है कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल देहरादून में कांग्रेस का मार्च जारी है और सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और पुलिस की ओर से पार्टी की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है। FIR वापस लेने और हल्द्वानी विवाद में कार्रवाई की कांग्रेस की मांग पर सरकार का रुख आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा तय कर सकता है।
राहुल गांधी के खिलाफ FIR ने उत्तराखंड में पहले से चल रहे राजनीतिक विवाद को नया मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस इसे लेकर आंदोलन के रास्ते पर है, जबकि बीजेपी अपने बचाव में लगातार जवाब दे रही है। ऐसे में देहरादून मार्च के बाद यह विवाद और कितना बढ़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

