Tuesday, November 3, 2026

होर्मुज से शिपिंग के लिए खुलेगा नया रास्ता, ईरान-ओमान समझौते के करीब; जल्द हो सकता है रूट का ऐलान

Share

 

 

 



तेहरान: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल **स्ट्रेट ऑफ होर्मुज** को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही के लिए एक नया शिपिंग रूट तय करने को लेकर ईरान और ओमान समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक दोनों देशों के बीच नए मार्ग के भौगोलिक निर्देशांकों को लेकर सहमति बन चुकी है और अब संयुक्त घोषणा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

ईरान के विदेश मंत्री **अब्बास अराघची** ने कहा है कि तेहरान और मस्कट होर्मुज के रास्ते शिपिंग को लेकर समझौते के करीब हैं। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो हाल के महीनों में बाधित हुए इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर कमर्शियल शिपिंग को सामान्य करने की दिशा में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि अभी समझौते की सभी शर्तों पर अंतिम मुहर लगना बाकी है। 

ईरान और ओमान के बीच क्या सहमति बनी?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता **इस्माइल बघाई** के मुताबिक दोनों देशों ने प्रस्तावित शिपिंग रूट के भौगोलिक निर्देशांकों को लेकर समझ बना ली है। ईरान का कहना है कि इस संबंध में संयुक्त घोषणा तैयार की जा रही है। हालांकि तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि बाहरी पक्षों का हस्तक्षेप समझौते की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। 
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों और बाहर निकलने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग कॉरिडोर की व्यवस्था पर चर्चा हुई है। ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच इस व्यवस्था के स्वरूप को लेकर बातचीत जारी है और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी मतभेद भी बने हुए हैं। 

क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी के तेल और गैस उत्पादक देशों से निकलने वाली ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

यही वजह है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, LNG सप्लाई, समुद्री माल ढुलाई और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत तक पर पड़ सकता है।

हाल के संघर्ष और सुरक्षा संबंधी जोखिमों के कारण इस इलाके में सामान्य शिपिंग व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। ऐसे में नया और सुरक्षित कॉरिडोर तैयार करने की कोशिश को वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 समझौते की राह में अभी भी कई चुनौतियां

हालांकि नए रूट को लेकर बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन इसे जमीन पर लागू करना आसान नहीं होगा। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े पक्षों ने प्रस्तावित व्यवस्था में फीस, प्रतिबंधों और बीमा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई है। ईरान से जुड़े प्राधिकरण को भुगतान करने पर अमेरिकी प्रतिबंधों का सवाल भी खड़ा हो सकता है। ([Reuters][4])

अमेरिका भी ऐसी किसी व्यवस्था को लेकर सतर्क है जिससे होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर ईरान को एकतरफा नियंत्रण मिलता दिखाई दे। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे सुरक्षित और निर्बाध नौवहन चाहते हैं और अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। 

 वैश्विक तेल बाजार पर रहेगी नजर

अगर ईरान और ओमान के बीच अंतिम समझौता हो जाता है और बड़े पैमाने पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से बहाल होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम कम होने से माल ढुलाई और बीमा लागत पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है।

फिलहाल दुनिया की नजर ईरान और ओमान की अगली घोषणा पर टिकी हुई है। नए शिपिंग रूट की शर्तें और उस पर नियंत्रण की व्यवस्था साफ होने के बाद ही यह पता चलेगा कि होर्मुज संकट के समाधान की दिशा में यह कितना बड़ा कदम साबित होता है।


Read more

Latest News