Wednesday, November 4, 2026

CJP प्रदर्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली किराना कमेटी

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन के संभावित असर को देखते हुए दिल्ली के व्यापारियों और किराना कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। व्यापारियों की चिंता है कि विरोध-प्रदर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही पर लगने वाली पाबंदियों के कारण उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी लगाने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की आशंका जताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट में व्यापारियों ने उठाया आजीविका का मुद्दा

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर व्यापारियों की ओर से अदालत में यह मुद्दा उठाया गया कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान आम लोगों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। कारोबारियों के लिए रोजाना की बिक्री बेहद अहम होती है। दुकानें बंद रहने या ग्राहकों की संख्या घटने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में आने-जाने का रास्ता बाधित होने से केवल बड़ी दुकानों पर ही नहीं, बल्कि छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और रोजाना कमाई पर निर्भर लोगों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को प्रदर्शन की व्यवस्था करते समय व्यापारिक गतिविधियों और आम नागरिकों की जरूरतों का भी ध्यान रखना चाहिए।

कनॉट प्लेस में CJP के प्रदर्शन को लेकर विवाद

CJP की ओर से 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क के आसपास ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। इस प्रदर्शन का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से है। प्रदर्शन को लेकर पहले से ही दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे। वहीं, व्यापारियों को आशंका है कि सुरक्षा कारणों से लगने वाले प्रतिबंधों और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने के चलते बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है।

इसी मुद्दे पर व्यापारियों की ओर से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि प्रदर्शन और कारोबार के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल आदेश देने से किया इनकार

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CJP के प्रदर्शन पर तत्काल कोई आदेश जारी नहीं किया। मुख्य न्यायाधीश ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। अदालत ने छोटे दुकानदारों की आजीविका से जुड़े सवाल को भी महत्वपूर्ण माना।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने संकेत दिया कि प्रदर्शन, व्यापार और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अदालत के सामने यह संतुलन बनाए रखने की चुनौती है कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार मिले, लेकिन इसके कारण दूसरे नागरिकों और व्यापारियों को अनुचित परेशानी का सामना न करना पड़े।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि प्रदर्शन या प्रशासन के किसी आदेश के कारण कारोबार और आजीविका को नुकसान होता है, तो मुआवजे के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी मुआवजे का आदेश नहीं दिया गया है।

NDMC के सेंट्रल पार्क बंद करने के फैसले पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) की ओर से सेंट्रल पार्क को बंद करने के आदेश का मुद्दा भी उठा। याचिकाकर्ता की ओर से आशंका जताई गई कि पार्क बंद होने से वहां काम करने वाले छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों की कमाई प्रभावित हो सकती है।

इस पर अदालत ने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक कदम से कारोबार को नुकसान होता है, तो संबंधित परिस्थितियों को देखते हुए मामले पर विचार किया जा सकता है। न्यायमूर्ति बागची ने संकेत दिया कि यदि कोई कदम अनुचित या जरूरत से ज्यादा पाया जाता है, तो अदालत अपने अधिकार क्षेत्र के तहत उचित राहत देने पर विचार कर सकती है।

यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि छोटे व्यापारियों की आमदनी काफी हद तक रोजाना की बिक्री पर निर्भर करती है। ऐसे में कुछ समय के लिए कारोबार प्रभावित होना भी उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट में भी चल रहा है मामला

CJP के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी सुनवाई हो चुकी है। हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार किया था। हालांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस की ओर से दिए गए आश्वासन को दर्ज किया कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस तरह मामला केवल प्रदर्शन की अनुमति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल, व्यापारियों की आजीविका, सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की सुविधा जैसे कई पहलू शामिल हैं।

26 अक्टूबर को फिर हो सकती है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्रदर्शन पर रोक लगाने का तत्काल आदेश नहीं दिया है। अदालत ने कहा कि यदि कारोबार या आजीविका को नुकसान होता है, तो इस मुद्दे को आगे की सुनवाई में उठाया जा सकता है। मामले को 26 या 27 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किए जाने की बात कही गई है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रशासन किस तरह व्यवस्था संभालते हैं। व्यापारियों की मांग है कि बाजारों तक पहुंच बनी रहे और उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो। दूसरी ओर, प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम चुनौती बना हुआ है।

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