
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है और दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है। 30 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार बातचीत करना चाहता है और अमेरिका के पास समझौते के लिए पर्याप्त समय है। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और युद्ध समाप्त होने की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ईरान के साथ बातचीत पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब ईरान के साथ बातचीत और युद्ध को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो रही है। ट्रंप ने कहा, “बातचीत चल रही है। वे बात करना चाहते हैं और लगातार बात कर रहे हैं। सच कहूं तो हमारे पास समय है।”
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत किस स्तर पर हो रही है, इसमें कौन-कौन शामिल है और किसी संभावित समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच क्या सहमति बनी है।
ट्रंप ने ईरान की मौजूदा स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका दावा है कि ईरान आर्थिक रूप से मुश्किल दौर से गुजर रहा है और वह अपने सैनिकों तथा पुलिसकर्मियों को वेतन देने की स्थिति में भी नहीं है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई विस्तृत आंकड़ा पेश नहीं किया।
ईरान युद्ध को सामान्य युद्ध नहीं मानते ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को सामान्य युद्ध से अलग बताया। उन्होंने कहा कि यह कोई पारंपरिक युद्ध नहीं है और अमेरिका के पास इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त समय है।
ट्रंप ने युद्ध पर होने वाले अमेरिकी खर्च को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि इस सैन्य अभियान पर अमेरिका अपेक्षाकृत कम पैसा खर्च कर रहा है। साथ ही उन्होंने वेनेजुएला का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान में खर्च किए गए पैसे की भरपाई वेनेजुएला से हुई है और वहां से अमेरिका को लगभग दस गुना फायदा मिला है।
हालांकि, ट्रंप ने अपने इस दावे को स्पष्ट करने के लिए कोई विस्तृत वित्तीय आंकड़ा या हिसाब सार्वजनिक नहीं किया। इसलिए युद्ध की वास्तविक लागत और वेनेजुएला से हुए कथित आर्थिक लाभ को लेकर उनके बयान को उनका दावा ही माना जाना चाहिए।
परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है सबसे बड़ा मुद्दा
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की सबसे बड़ी वजहों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम शामिल है। अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की शर्तों और प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है।
ट्रंप ने अपने बयान में परमाणु हथियारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने परमाणु हथियार के खतरे को खत्म करने के लिए काफी पैसा खर्च किया है। अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा गारंटी की मांग लगातार उठाई जा रही है।
30 अक्टूबर को एक रेडियो इंटरव्यू में भी ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन इसके लिए यह गारंटी जरूरी है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। इससे साफ है कि किसी भी संभावित समझौते में परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा महत्वपूर्ण रहने वाला है।
पाकिस्तान और कतर के जरिए भी हो रहे हैं कूटनीतिक प्रयास
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने के लिए कई देशों ने मध्यस्थता की कोशिश की है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर की भूमिका भी सामने आई है। दोनों देशों के जरिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान और समझौते की संभावनाओं पर बातचीत की कोशिशें हुई हैं।
इससे पहले जून में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच एक समझौते का ढांचा तैयार हुआ था। इसमें युद्ध समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही, ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत तथा ईरान की जब्त संपत्तियों जैसे मुद्दों पर चर्चा शामिल थी। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच शर्तों को लेकर मतभेद बने रहे और कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका।
अक्टूबर में भी कतर की ओर से एक नया प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया, लेकिन ईरान की तरफ से उसे स्वीकार्य नहीं बताया गया। ऐसे में मध्यस्थ देशों की कोशिशों के बावजूद बातचीत को किसी अंतिम नतीजे तक पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।
क्या जल्द खत्म होगा ईरान और अमेरिका का युद्ध?
ट्रंप के ताजा बयान से बातचीत की संभावनाएं जरूर सामने आई हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर कोई अंतिम सहमति बन गई है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, तेल निर्यात और सैन्य गतिविधियों को लेकर कई बड़े मतभेद अभी भी मौजूद हैं।
एक तरफ ट्रंप बातचीत जारी रहने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया है। इससे साफ है कि अमेरिका कूटनीतिक बातचीत के साथ सैन्य विकल्प भी खुला रखना चाहता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिका और ईरान किसी ऐसे समझौते तक पहुंच पाएंगे, जिससे महीनों से जारी संघर्ष समाप्त हो सके। अगर दोनों देशों के बीच बातचीत सफल होती है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
