
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से चल रहे अभूतपूर्व छात्र आंदोलन और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के उग्र प्रदर्शनों के बीच एक बहुत बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों व पेपर लीक मामले को लेकर देशभर के लाखों छात्र सड़क पर थे। यह इस्तीफा सरकार और आंदोलनकारी छात्रों (CJP) के बीच होने वाली तीसरे दौर की अहम बैठक से ठीक कुछ घंटे पहले आया है।
कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच’ संग्राम?
इस पूरे विवाद की नींव तब पड़ी जब NEET-UG परीक्षा में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक के आरोप लगे। शुरुआत में सोशल मीडिया और अदालत में हुई कुछ टिप्पणियों के बाद देश के युवाओं और छात्रों ने खुद को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले एकजुट करना शुरू किया। जो आंदोलन एक व्यंग्यात्मक विरोध (Satirical Protest) के रूप में शुरू हुआ था, उसने देखते ही देखते एक विशाल जनांदोलन का रूप ले लिया। दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर पिछले 30 से अधिक दिनों से इन छात्र प्रदर्शनकारियों का मुख्य केंद्र बना हुआ था। जंतर-मंतर पर बढ़ा तनाव और राजनीतिक दबावजंतर-मंतर पर छात्रों का यह आंदोलन उस वक्त और अधिक आक्रामक हो गया जब: संसद मार्च (Chalo Sansad): हाल ही में शुरू हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान हजारों की संख्या में छात्रों ने संसद की ओर कूच करने की कोशिश की, जहाँ पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं। सोनम वांगचुक का अनशन: प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में लगातार भूख हड़ताल की, जिससे इस आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का बड़ा ध्यान मिला।
इस्तीफा देखने के लिए लिंक में कि्लीक करें :
https://x.com/dpradhanbjp/status/2080938216505667663?s=20
विपक्ष का हमला:
कांग्रेस, राहुल गांधी और अन्य प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया और लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे। CJP की मुख्य मांगों में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने की सख्त नीति शामिल थी। छात्रों का साफ कहना था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनके लिए “नॉन-नेगोशिएबल” (गैर-समझौतावादी) शर्त है। सरकार की बातचीत और पीएम मोदी का बड़ा फैसला स्थिति को गंभीर होता देख केंद्र सरकार ने मामले को शांत करने के लिए प्रयास शुरू किए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने CJP के प्रतिनिधियों के साथ मैराथन बैठकें कीं।
शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान सरकार ने छात्रों की कुछ मांगों पर सहमति जताई थी, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा था। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए देर रात युवाओं को संबोधित किया था और पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून व ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ बनाने का वादा किया। लेकिन प्रदर्शनकारियों का आक्रोश कम नहीं हुआ, जिसके चलते आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को अपनी जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना पड़ा।
क्या लिखा धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चिट्ठी में? 
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को भेजी गई अपनी चिट्ठी में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि: “देश के करोड़ों छात्रों का विश्वास और हमारी शिक्षा व्यवस्था की शुचिता सबसे ऊपर है। परीक्षाओं को लेकर उपजे असंतोष और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मैं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूँ।”उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने पारदर्शी जांच के लिए हमेशा सहयोग किया है और वे नहीं चाहते कि किसी विवाद के कारण छात्रों के भविष्य पर कोई नकारात्मक असर पड़े। आगे क्या होगा? (Next Steps)धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि:
नया शिक्षा मंत्री कौन होगा:
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) बहुत जल्द नए शिक्षा मंत्री के नाम का ऐलान कर सकता है।क्या आंदोलन खत्म होगा? CJP और छात्र संगठनों का कहना है कि वे इस्तीफे के फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन परीक्षा सुधारों (Exam Reforms) और कानून बनने की लिखित गारंटी मिलने के बाद ही जंतर-मंतर खाली करेंगे। यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति और छात्र आंदोलनों के इतिहास में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ युवाओं की लामबंदी ने सरकार को एक बड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया
