Sunday, September 6, 2026

राहुल गांधी का अमित शाह से तीखा सवाल: ‘छात्रों पर गोली चलाने की इजाजत किसने दी?’

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नई दिल्ली:  संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधा सवाल पूछा है कि आखिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे देश के युवाओं पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी?

गृह मंत्रालय और अमित शाह से राहुल गांधी के सीधे सवाल

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसद में संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार को इस कार्रवाई की सीधी जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने कहा, *”मुख्य मुद्दा भाषण देने का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है। अमित शाह को यह साफ करना चाहिए कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग का आदेश उन्होंने खुद दिया था या गृह मंत्रालय के किसी अन्य अधिकारी ने?”*

राहुल गांधी ने आगे कहा कि यदि यह आदेश गृह मंत्री की सहमति से दिया गया था, तो वे युवाओं पर हुए अत्याचार के सीधे दोषी हैं। और यदि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी, तो यह उनकी प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। दोनों ही परिस्थितियों में उन्हें अपने पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

विपक्ष का संसद में हंगामा और तीन प्रमुख मांगें

विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामा किया, जिससे कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार के समक्ष तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:

1. कार्रवाई पर स्पष्टीकरण: गृह मंत्री अमित शाह संसद में स्पष्ट करें कि छात्रों पर पैलेट गन और बल प्रयोग का आदेश किसने दिया था।
2. प्रधानमंत्री से माफी की मांग: छात्र आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से माफी मांगें।
3. अन्य वित्तीय अनियमितताओं पर जवाबदेही: राम मंदिर निर्माण से जुड़े फंड के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर भी सरकार स्थिति स्पष्ट करे।

सरकार और सत्तापक्ष का पलटवार

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित करार दिया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद के पटल पर छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने राहुल गांधी से अपने आरोपों का ठोस प्रमाण देने या सदन से माफी मांगने की मांग की।

वहीं, सरकार की तरफ से मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि कोई भी केंद्रीय मंत्री किसी भी स्थिति में सीधी गोलीबारी या लाठीचार्ज का आदेश नहीं देता। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट और स्थानीय पुलिस प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेते हैं।

क्या है पूरा मामला?

हाल के दिनों में नीट (NEET) और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धांधली के विरोध में देश भर के हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए थे। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। हालांकि, पुलिस द्वारा प्रदर्शन को हटाने के लिए किए गए बल प्रयोग में कई छात्र घायल हो गए। इस घटना के बाद से ही विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं और संसद में इस मुद्दे पर व्यापक बहस की मांग कर रहे हैं।

संसद सत्र के अंतिम दौर में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तीखा होने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मुद्दे पर औपचारिक जवाब देकर गतिरोध समाप्त करती है या सियासी घमासान और बढ़ेगा।

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