Sunday, September 6, 2026

भारत आ रहे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान: नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में लेंगे हिस्सा

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नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के केंद्र में इस समय भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले **18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन** में भाग लेने के लिए ईरान के राष्ट्रपति **मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian)** नई दिल्ली आ रहे हैं। यह उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है।

ईरान के ब्रिक्स का पूर्णकालिक सदस्य बनने के बाद राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह पहला औपचारिक भारत दौरा होगा। इस ऐतिहासिक यात्रा पर न केवल ब्रिक्स सदस्य देशों की, बल्कि पूरे वैश्विक समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं।

18वां ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की अध्यक्षता में वैश्विक मंथन

भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्राजील से ब्रिक्स संगठन की अध्यक्षता ग्रहण की थी। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे शिखर सम्मेलन की आधिकारिक थीम है:

> **”लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability)**

इस सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ-साथ ब्रिक्स के अन्य सभी सदस्य देशों के शीर्ष राष्ट्रप्रमुख और प्रतिनिधि नई दिल्ली में एक मंच पर जुटेंगे।

 दौरे के मुख्य बिंदु और संभावित द्विपक्षीय वार्ता

ईरानी राष्ट्रपति की इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी **द्विपक्षीय बैठक (Bilateral Meeting)** होने की प्रबल संभावना है। दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को गहरा करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो सकती है:

चाबहार बंदरगाह विकास (Chabahar Port):  भारत और ईरान के रणनीतिक संबंधों में चाबहार पोर्ट की अहम भूमिका है। दोनों देश इस बंदरगाह के पूर्ण परिचालन और मध्य एशिया तक व्यापार विस्तार पर बात करेंगे।
INSTC प्रोजेक्ट:’ अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे‘ (International North–South Transport Corridor) को गति देने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सहमति की उम्मीद है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार:  वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ईरान द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाने के लिए स्थानीय मुद्रा प्रणाली पर केंद्रित चर्चा आगे बढ़ा सकते हैं।
ऊर्जा एवं वाणिज्यिक सुरक्षा:  दोनों देश ऊर्जा आपूर्ति, कृषि व्यापार और वाणिज्यिक सुरक्षा के मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम देंगे।

 पश्चिम एशिया में शांति और कूटनीतिक मायने

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और हलचल के बीच ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत दौरे पर आए ईरान के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञों ने भी यह रेखांकित किया है कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने और कूटनीतिक समाधान खोजने में एक **महत्वपूर्ण मध्यस्थ** की भूमिका निभा सकता है।

ईरान का रुख स्पष्ट रहा है कि सैन्य संघर्ष के बजाय बातचीत और कूटनीति ही स्थायी समाधान का मार्ग है। ऐसे में नई दिल्ली की धरती से भारत-ईरान संवाद पूरे क्षेत्र में स्थिरता का एक सकारात्मक संदेश दे सकता है।

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करेगा BRICS

ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ब्रिक्स परिवार में शामिल होने के बाद से यह समूह **ग्लोबल साउथ (Global South)** की सबसे सशक्त आवाज बनकर उभरा है।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन वैश्विक आर्थिक प्रणालियों में सुधार, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) और विकासशील देशों के हितों की रक्षा के लिए एक नया रोडमैप तैयार करेगा।

 निष्कर्ष

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की यह भारत यात्रा भारत-ईरान के पारंपरिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेगी। चाबहार बंदरगाह से लेकर ब्रिक्स के बहुपक्षीय मंच तक, दोनों देश वैश्विक आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं। नई दिल्ली में होने वाला यह 18वां BRICS समिट वैश्विक कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव की एक और मिसाल बनेगा।

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