
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस मुश्किल समय में भारत एक बार फिर अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है। भारत ने नेपाल के लिए राहत और बचाव अभियान को और तेज करते हुए 21.5 टन राहत सामग्री लेकर दो सैन्य परिवहन विमानों को रवाना किया। इस नई खेप में मेडिकल सप्लाई के साथ-साथ फॉरेंसिक किट भी शामिल हैं, जो राहत, बचाव और लापता लोगों की पहचान के प्रयासों में मदद करेंगी।
नेपाल के लिए भारत की लगातार मदद
26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद से ही नेपाल में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। ऐसे समय में भारत ने राहत सहायता को लगातार जारी रखा है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की ओर से भेजी गई यह नई खेप राहत सामग्री की छठी खेप है। इसके साथ नेपाल को दी गई भारत की कुल राहत सहायता लगभग 74 टन तक पहुंच गई है।
C-130J विमानों से पहुंची मदद
भारत ने राहत सामग्री को तेजी से नेपाल पहुंचाने के लिए दो C-130J सैन्य विमान भेजे। इन विमानों में 21.5 टन मानवीय सहायता सामग्री भेजी गई। इसमें आवश्यक मेडिकल सामान और फॉरेंसिक किट शामिल हैं।
फॉरेंसिक किट की मदद से बाढ़ और मलबे में मिले अज्ञात शवों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। वहीं मेडिकल सामग्री प्रभावित लोगों के इलाज और राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में उपयोगी होगी।
राहत और बचाव अभियान को मिलेगी मजबूती
नेपाल में बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौती राहत और बचाव अभियान को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। ऐसे में हवाई मार्ग से राहत सामग्री भेजना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत की ओर से भेजी गई नई सहायता का उद्देश्य नेपाल के राहत-बचाव अभियान को मजबूत करना और बाढ़ प्रभावित समुदायों तक जरूरी सामान पहुंचाना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि अतिरिक्त सहायता से जारी राहत और बचाव प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
पहले भी भेजी गई थी राहत सामग्री
भारत की मदद सिर्फ इस नई खेप तक सीमित नहीं है। 26 अगस्त को नेपाल में फ्लैश फ्लड आने के कुछ ही समय बाद भारत ने पहली राहत खेप भेजी थी। शुरुआती सहायता में टेंट, स्लीपिंग बैग, दवाएं, हाइजीन किट और सोलर लैंप जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं।
इसके बाद भारत ने लगातार कई राहत उड़ानें नेपाल भेजीं। एक अन्य भारतीय विमान में 11 सदस्यीय बचाव दल और विशेष उपकरणों के साथ 5.5 टन आवश्यक दवाएं भी भेजी गई थीं। भारत ने राहत सामग्री के अलावा डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें भी नेपाल भेजी हैं।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भी मदद
नेपाल में बाढ़ से कई बुनियादी ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
भारत ने इस अभियान में भी सहयोग के लिए विशेषज्ञ टीमों को भेजा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भारत की ओर से विशेष टनेल रेस्क्यू टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी नेपाल में तैनात की गई है। इसका उद्देश्य बचाव कार्यों के साथ-साथ मृतकों और लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया में सहायता करना है।
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को पहुंचाया भारी नुकसान
प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ में 35 मोटरेबल पुल, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं पहुंचाना मुश्किल हो गया है।
ऐसे हालात में भारत की ओर से हवाई मार्ग के जरिए राहत सामग्री भेजना काफी अहम माना जा रहा है। इससे उन क्षेत्रों तक भी सहायता पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है।
‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति का संदेश
नेपाल के संकट के समय भारत की लगातार सहायता को दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर हर संभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया था। इसके बाद भारत की ओर से राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमों की लगातार तैनाती की गई।
भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के समय भारत की ओर से तत्काल सहायता पहुंचाना पड़ोसी प्रथम की भावना को भी दर्शाता है।
आगे भी जारी रहेगी सहायता
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और विशेषज्ञ टीमों की जरूरत बनी रह सकती है।
भारत की नई 21.5 टन राहत खेप इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। अब तक करीब 74 टन राहत सामग्री भेजे जाने के साथ भारत ने साफ संकेत दिया है कि नेपाल की इस कठिन घड़ी में वह उसके साथ खड़ा है।
कुल मिलाकर, नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बीच भारत की लगातार मानवीय सहायता न केवल प्रभावित लोगों के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध करा रही है, बल्कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग और भरोसे को भी मजबूत कर रही है। आने वाले समय में राहत और पुनर्वास की प्रक्रिया में यह सहायता नेपाल के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
