
नई दिल्ली में चुनाव आयोग (EC) को लेकर कांग्रेस की गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पार्टी ने 5 अक्टूबर को AICC प्रभारियों और प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर पार्टी के आगे के आंदोलन और राजनीतिक कार्यक्रम की रणनीति पर चर्चा करना है। बैठक ऐसे समय हो रही है जब विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन की बनेगी रणनीति
कांग्रेस की यह बैठक सिर्फ संगठनात्मक चर्चा तक सीमित नहीं रहने वाली है। पार्टी के सामने सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि चुनाव आयोग को लेकर अपनी आपत्तियों और मांगों को आगे किस तरीके से उठाया जाए।
रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के AICC प्रभारी और PCC अध्यक्ष बैठक में शामिल होकर राज्यों में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रूपरेखा पर चर्चा करेंगे। पार्टी का उद्देश्य अलग-अलग राज्यों में अपने कार्यक्रमों को एक समन्वित अभियान के रूप में आगे बढ़ाना है।
कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी भी गलत काम से इनकार करते हुए कहा है कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया कानून के तहत तय नियमों के अनुसार की जाती है।
SIR को लेकर विपक्ष और EC आमने-सामने
इस पूरे विवाद के केंद्र में Special Intensive Revision यानी SIR है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत होती है और इसका उद्देश्य सूची में गलत या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना तथा पात्र मतदाताओं के रिकॉर्ड को दुरुस्त रखना है।
इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ा है। अब कांग्रेस की बैठक में यह तय किया जा सकता है कि पार्टी SIR के मुद्दे को आने वाले दिनों में किस स्तर तक और किन मंचों पर उठाएगी।
INDIA ब्लॉक पहले ही बना चुका है आंदोलन का प्लान
कांग्रेस की बैठक से पहले INDIA ब्लॉक के नेताओं की भी अहम बैठक हो चुकी है। 30 सितंबर को हुई बैठक में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे के आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की थी।
बैठक के बाद विपक्षी दलों ने जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक प्रदर्शन करने की योजना की घोषणा की। रिपोर्टों के मुताबिक, 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देश के अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। इसके अलावा 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करने का कार्यक्रम भी सामने आया है।
विपक्ष ने नवंबर में दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित करने की योजना भी बताई है। ऐसे में कांग्रेस की 5 अक्टूबर की बैठक को इन कार्यक्रमों के बीच संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
6 अक्टूबर को EC तक मार्च की तैयारी
INDIA ब्लॉक के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च कर सकते हैं। इस मार्च में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों को उठाने की योजना है।
कांग्रेस के लिए यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी राज्यों में अपने संगठन को सक्रिय करने के साथ-साथ दिल्ली में भी बड़े स्तर पर आंदोलन की तैयारी कर रही है।
हालांकि, अलग-अलग विपक्षी दलों की रणनीति में कुछ अंतर भी सामने आए हैं। इसलिए कांग्रेस की बैठक में यह भी चर्चा हो सकती है कि पार्टी अपने स्तर पर कौन से कार्यक्रम करेगी और INDIA ब्लॉक के साझा कार्यक्रमों में किस तरह भागीदारी करेगी।
विपक्षी दलों के प्रदर्शन से बढ़ा राजनीतिक दबाव
चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब कई राज्यों तक पहुंच चुका है। 4 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।
मुंबई में भी विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रदर्शन किया, जिसमें कांग्रेस के साथ NCP-SP और उद्धव ठाकरे तथा राज ठाकरे से जुड़े राजनीतिक समूहों के नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने SIR को समाप्त करने और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव से जुड़ी मांगें भी उठाईं।
इन घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस की आज की बैठक का महत्व बढ़ गया है।
ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस का रुख
कांग्रेस लंबे समय से CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग के कामकाज में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं और SIR की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवालों के जवाब जरूरी हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से अलग रुख रखा गया है। आयोग का कहना है कि उसकी प्रक्रियाएं कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती हैं।
इसी बीच ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं पहुंची हैं। 5 अक्टूबर को इनसे जुड़े मामलों पर सुनवाई निर्धारित होने की खबरें भी सामने आई हैं।
आगे की रणनीति पर रहेगी नजर
कांग्रेस की 5 अक्टूबर की बैठक के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ अपने आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाएगी। राज्यों में प्रदर्शन, दिल्ली में कार्यक्रम और INDIA ब्लॉक के संयुक्त आंदोलन के बीच कांग्रेस अपने संगठन को किस तरह सक्रिय करती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच SIR, मतदाता सूची और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। कांग्रेस की बैठक के बाद आंदोलन का अगला चरण और स्पष्ट होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में 6 अक्टूबर के मार्च और नवंबर में प्रस्तावित बड़े प्रदर्शन पर भी राजनीतिक नजर बनी रहेगी।
