
रामपुर (उत्तर प्रदेश): समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद आजम खान द्वारा संचालित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को एक बार फिर बड़ी कानूनी व प्रशासनिक राहत मिली है। विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बने 38 भवनों/संरचनाओं के ध्वस्तीकरण (Demolition) पर मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर (मंडलायुक्त) ने अंतरिम रोक लगा दी है।
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा पूर्व में जारी किए गए ध्वस्तीकरण के नोटिस और आदेश के खिलाफ जौहर ट्रस्ट ने मंडलायुक्त की अदालत में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए मंडलायुक्त ने फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर स्टे दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए एक सर्वे और जांच से जुड़ा है। प्राधिकरण का आरोप था कि विश्वविद्यालय परिसर में बने कई भवन और निर्माण कार्य:
बिना स्वीकृत मानचित्र (Approved Map) के तैयार किए गए हैं।
उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 के नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए हैं।
नियमानुसार आवश्यक एनओसी (NOC) और स्वीकृतियों के बिना निर्मित हैं।
इस संबंध में रामपुर विकास प्राधिकरण की न्यायाधिकरण (Tribunal/Authority Board) ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्राधिकरण की ओर से परिसर की लगभग 38 इमारतों को अवैध घोषित करते हुए उन्हें गिराने (ध्वस्तीकरण) का आदेश पारित कर दिया गया था।
जौहर ट्रस्ट की अपील और कोर्ट का फैसला
विकास प्राधिकरण के इस कड़े रुख के बाद जौहर यूनिवर्सिटी का संचालन करने वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने इस फैसले को मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत में चुनौती दी।
ट्रस्ट की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने दलील दी कि:

प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन:
यूनिवर्सिटी प्रशासन को अपना पक्ष पूरी तरह रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
मानचित्र और प्रक्रिया: विश्वविद्यालय की स्थापना और निर्माण के समय सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, और इस तरह अचानक 38 प्रमुख भवनों को अवैध घोषित करना विधि-सम्मत नहीं है।
छात्रों का भविष्य: यदि इन भवनों पर कोई कार्रवाई होती है, तो वहां पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई और भविष्य पर इसका सीधा और प्रतिकूल असर पड़ेगा।
दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद मंडलायुक्त ने प्राधिकरण के आदेश पर अंतरिम स्थगादेश (Interim Stay) जारी कर दिया। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई तक विकास प्राधिकरण को किसी भी प्रकार की दंडात्मक या बुलडोजर कार्रवाई न करने के निर्देश दिए हैं।
विश्वविद्यालय और छात्रों को मिली बड़ी सांस
कमिश्नर के इस फैसले से विश्वविद्यालय प्रशासन और वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों ने राहत की सांस ली है। विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासनिक ब्लॉक, हॉस्टल, लाइब्रेरी और विभिन्न संकायों (Faculties) की इमारतें शामिल हैं। यदि प्राधिकरण का ध्वस्तीकरण आदेश लागू हो जाता, तो विश्वविद्यालय का दैनिक संचालन लगभग ठप हो जाता।
विश्वविद्यालय से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि वे न्यायपालिका और प्रशासनिक अपीलीय प्रक्रिया में पूरा विश्वास रखते हैं और वे सभी आवश्यक दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करेंगे ताकि मामले का स्थायी समाधान निकल सके।
आगे क्या होगा?
यद्यपि यह रोक अंतरिम (Interim Stay) है, लेकिन इसने जौहर ट्रस्ट को अपना पक्ष कानूनी रूप से मजबूत करने का समय दे दिया है।
आगामी सुनवाई: मामले की अगली तारीख पर रामपुर विकास प्राधिकरण को अपना विस्तृत जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
दस्तावेजों की जांच: अदालत अब दोनों पक्षों के मानचित्रों, सरकारी अभिलेखों और निर्माण संबंधी स्वीकृतियों का बारीक विश्लेषण करेगी।
अंतिम निर्णय: यदि ट्रस्ट यह साबित करने में सफल रहता है कि निर्माण नियम अनुसार हुए थे या उन्हें शमन (Compounding) के तहत नियमित किया जा सकता है, तो यूनिवर्सिटी को स्थायी राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष
रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कुछ वर्षों से कई कानूनी और भूमि संबंधी विवादों का सामना कर रही है। ऐसे में 38 भवनों के ध्वस्तीकरण पर कमिश्नर द्वारा लगाई गई यह रोक विश्वविद्यालय के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण संजीवनी साबित हुई है। फिलहाल, सभी की निगाहें मंडलायुक्त अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस हाई-प्रोफाइल मामले का अंतिम भविष्य तय होगा।
