Sunday, September 6, 2026

NEET के खिलाफ प्रस्ताव का DMK ने किया समर्थन, विधानसभा में सर्वसम्मति की मांग

Share

तमिलनाडु की राजनीति में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (**NEET**) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (**DMK**) ने NEET परीक्षा से तमिलनाडु को छूट देने और राज्य बोर्ड के अंकों के आधार पर मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया बहाल करने वाले प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया है। इसके साथ ही, पार्टी ने राज्य विधानसभा के सभी राजनीतिक दलों से इस प्रस्ताव पर **सर्वसम्मति** से एक साथ आने की जोरदार अपील की है।

 पृष्ठभूमि और प्रस्ताव का उद्देश्य

तमिलनाडु लंबे समय से NEET आधारित प्रवेश प्रणाली का विरोध करता रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि NEET परीक्षा की शुरुआत के बाद से राज्य की अपनी शिक्षा प्रणाली, विशेषकर सरकारी और ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भारी नुकसान हुआ है।

* **ऐतिहासिक व्यवस्था:** NEET लागू होने से पहले, तमिलनाडु में मेडिकल सीटों पर दाखिला 12वीं (प्लस टू) कक्षा के अंकों के आधार पर होता था।
* **वर्तमान स्थिति:** राज्य सरकार का तर्क है कि NEET ने छात्रों के बीच असमानता बढ़ाई है और शिक्षा के व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया है।

DMK का स्पष्ट मानना है कि राज्यों को अपनी स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं के अनुसार मेडिकल प्रवेश मानदंड तय करने की स्वायत्तता होनी चाहिए।

 NEET के विरोध के मुख्य कारण

DMK और NEET विरोधी समूहों का मानना है कि यह परीक्षा सामाजिक न्याय और निष्पक्ष अवसर के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसके प्रमुख कारणों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

 1. ग्रामीण और राज्य बोर्ड के छात्रों पर प्रभाव

NEET का पाठ्यक्रम मुख्य रूप से सीबीएसई (CBSE) पैटर्न पर आधारित होता है। राज्य बोर्ड (State Board) में पढ़ने वाले और मुख्य रूप से ग्रामीण या आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के लिए इस परीक्षा में उच्च अंक पाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

 2. महंगी कोचिंग संस्कृति की बढ़ती भूमिका

NEET में सफलता के लिए अक्सर निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है। जो परिवार महंगी कोचिंग फीस देने में सक्षम नहीं हैं, उनके मेधावी बच्चे प्रतियोगिता में पिछड़ जाते हैं।

3. राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर असर

तमिलनाडु में एक मजबूत ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा है। पहले स्थानीय छात्र राज्य के मेडिकल कॉलेजों से पढ़कर स्थानीय स्तर पर ही अपनी सेवाएं देते थे। NEET के कारण अन्य राज्यों या शहरी क्षेत्रों के छात्रों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता प्रभावित होने की चिंता जताई गई है।

 विधानसभा में सर्वसम्मति की आवश्यकता क्यों?

DMK ने जोर देकर कहा है कि NEET के खिलाफ लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि तमिलनाडु के छात्रों और उनके भविष्य की सुरक्षा की लड़ाई है।

> “जब पूरी विधानसभा एक स्वर में NEET से छूट की मांग करेगी, तब केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के समक्ष राज्य का पक्ष अत्यधिक मजबूत होगा। सामाजिक न्याय और शिक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए सभी दलों को दलीय राजनीति से ऊपर उठना होगा।”

विधानसभा में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित होने से केंद्र सरकार और कानूनी मंचों पर एक मजबूत राजनीतिक व संवैधानिक संदेश जाता है।

राज्य के अधिकारों और संघवाद का सवाल

NEET विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह **भारतीय संघवाद (Federalism)** और राज्यों के अधिकारों से भी जुड़ा विषय बन चुका है।

1. **शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) में है:** इसलिए राज्यों का तर्क है कि प्रवेश प्रणाली तय करने में उनकी भूमिका और राय को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
2. **संवैधानिक संशोधन की मांग:** राज्य सरकार का प्रयास है कि केंद्र तमिलनाडु को NEET से विशेष छूट देने वाला विधेयक (Exemption Bill) मंजूर करे।

निष्कर्ष

DMK द्वारा NEET विरोधी प्रस्ताव के समर्थन और विधानसभा में सर्वसम्मति की मांग ने राज्य में सामाजिक न्याय की डिबेट को नई दिशा दी है। ग्रामीण व वंचित वर्ग के छात्रों को समान अवसर प्रदान करना और राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत बनाए रखना इस आंदोलन के केंद्र में है। यदि तमिलनाडु विधानसभा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर केंद्र पर दबाव बनाने में सफल होती है, तो यह देश में राज्यों के अधिकारों और केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षाओं के ढांचे पर एक नया उदाहरण स्थापित कर सकता है।

Read more

Latest News