Sunday, September 6, 2026

SIR पर फिर मचा सियासी बवाल! वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम हटाया गया

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पंजाब में चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। इस बार मामला राज्यसभा सांसद और बीजेपी नेता राघव चड्ढा से जुड़ा है। पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम नजर नहीं आया है। उनके नाम को ASDD यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची में रखा गया है और उनके सामने “Permanently Shifted” यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित लिखा गया है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि यह फाइनल वोटर लिस्ट नहीं, बल्कि ड्राफ्ट सूची है। इसलिए अभी राघव चड्ढा का नाम हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर नहीं हुआ है। उन्हें अपने नाम को लेकर दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद नाम दोबारा शामिल किया जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसके लिए 12 सितंबर 2026 तक आवेदन और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है।

राघव चड्ढा ने लगाए राजनीतिक बदले के आरोप

वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उन्हें “शिफ्टेड” बताया गया।

चड्ढा ने इस कार्रवाई को महज प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक बदले की भावना से किया गया कदम है। उनके मुताबिक, उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा और इसके बाद से ही उनके खिलाफ राजनीतिक कार्रवाई की जा रही है।

राघव चड्ढा का कहना है कि अगर उन्हें वास्तव में स्थानांतरित मतदाता के तौर पर चिन्हित किया गया था, तो इस प्रक्रिया में उन्हें उचित तरीके से शामिल किया जाना चाहिए था। उन्होंने SIR के नियमों और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

AAP ने आरोपों से किया इनकार

राघव चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि वोटर लिस्ट की तैयारी और SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और पंजाब सरकार का इसमें यह तय करने का अधिकार नहीं है कि किस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में रखा जाए या हटाया जाए।

यही वजह है कि इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। एक तरफ चड्ढा इसे राजनीतिक बदले से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ AAP आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हवाला दे रही है।

SIR में लाखों नाम हटाए गए

राघव चड्ढा का नाम हटना पंजाब में चल रहे बड़े SIR अभियान का हिस्सा है। चुनाव आयोग की ड्राफ्ट सूची में पंजाब के करीब 20.66 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इन नामों को मुख्य रूप से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है।

ऐसे में चड्ढा का नाम हटना अपने आप में अलग मामला जरूर है, क्योंकि वह एक प्रमुख राजनीतिक चेहरा और राज्यसभा सांसद हैं। इसी वजह से इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और ऐसे नामों की पहचान करना है जो निर्धारित मानकों के अनुसार सूची में नहीं होने चाहिए। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, उन्हें दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी दिया जा रहा है।

अभी खत्म नहीं हुआ मामला

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राघव चड्ढा का नाम फिलहाल ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि उनका नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से बाहर हो गया है। SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

राघव चड्ढा ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि मौजूदा सूची अंतिम नहीं है और वह नियमों के तहत अपने नाम को दोबारा शामिल कराने की प्रक्रिया अपना रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब की अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होने की उम्मीद है।

बीजेपी बनाम AAP की सियासत तेज

इस पूरे विवाद का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि राघव चड्ढा कुछ समय पहले तक आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। वह 2022 में AAP के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। बाद में 2026 में उन्होंने बीजेपी का रुख किया। इसके बाद से ही उनकी राजनीतिक भूमिका और पंजाब की राजनीति में उनकी स्थिति चर्चा में रही है।

अब वोटर लिस्ट से उनका नाम हटने के बाद बीजेपी और AAP के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव से जोड़ सकता है, जबकि AAP चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हवाला देकर अपना बचाव कर रही है।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि राघव चड्ढा की ओर से दाखिल की जाने वाली आपत्ति पर क्या फैसला होता है। अगर उनके दावे को स्वीकार कर लिया जाता है तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में फिर शामिल हो सकता है। वहीं, अगर किसी कारण से दावा खारिज होता है तो विवाद और गहरा सकता है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि SIR विवाद ने पंजाब की राजनीति में एक नया मुद्दा दे दिया है। एक तरफ मतदाता सूची को साफ और अपडेट करने की चुनाव आयोग की प्रक्रिया है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दल इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।

राघव चड्ढा का मामला अब केवल एक सांसद के वोटर लिस्ट से नाम हटने तक सीमित नहीं रह गया है। यह चुनाव आयोग, SIR और राजनीतिक आरोपों के बीच चल रही बड़ी बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में दावा-आपत्ति की प्रक्रिया और अंतिम वोटर लिस्ट यह तय करेगी कि राघव चड्ढा का नाम वापस जुड़ता है या यह विवाद और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता है।

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