
नई दिल्ली: रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में दो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तेल टैंकरों पर ड्रोन हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। UAE ने इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे समुद्री डकैती की कार्रवाई बताया है। दोनों टैंकर अबू धाबी की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ADNOC से जुड़े थे। हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना गुरुवार शाम उस समय हुई जब दोनों टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे। ADNOC के अनुसार, हमले के बाद स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया। ब्रिटेन के United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने भी बताया कि होर्मुज से गुजर रहे दो जहाजों को ड्रोन हमले में मामूली नुकसान पहुंचा। हालांकि UKMTO ने तत्काल इन जहाजों की पहचान नहीं की थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह वही घटना प्रतीत होती है।
UAE के विदेश मंत्रालय ने हमले की कड़ी निंदा की है। अबू धाबी का आरोप है कि ईरान ने जानबूझकर वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य को आर्थिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया। UAE ने इसे नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर समुद्री डकैती जैसी कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे खुले समुद्र से जोड़ने वाला यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या जहाजों की आवाजाही में बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर पड़ सकता है। हाल के घटनाक्रमों के बीच इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी कमी आई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
हालिया हमले ऐसे समय हुए हैं जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज में समुद्री यातायात पहले ही प्रभावित है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं, जबकि अमेरिका की ओर से भी ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजारों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है।
तेल बाजार पर भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है। हालिया जहाज हमलों और क्षेत्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, 14 अगस्त को ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.45 डॉलर बढ़कर 88.52 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI 1.15 डॉलर बढ़कर 82.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
UAE के अनुसार, वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिरता के लिए आवश्यक है। दूसरी ओर, हमले को लेकर ईरान की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में आने वाले दिनों में क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिक्रिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।
होर्मुज में बढ़ता तनाव केवल खाड़ी देशों तक सीमित मुद्दा नहीं है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार, बीमा लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि दो UAE टैंकरों पर हुए ड्रोन हमले को क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
