Tuesday, November 3, 2026

इजराइल चुनाव में 99.7% वोटों की गिनती पूरी, नेतन्याहू गुट को 53 सीटें; बहुमत से पीछे

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इजराइल में संसदीय चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है। चुनाव में लगभग 99.7 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान सामने आया। हालांकि, यह आंकड़ा सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से काफी कम है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं, जबकि अरब दलों ने कुल 19 सीटों पर जीत हासिल की है।

इजराइल की संसद को नेसेट (Knesset) कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। यहां किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में चुनाव परिणामों के बाद किसी भी प्रमुख गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। इस स्थिति ने सरकार गठन को लेकर राजनीतिक बातचीत और गठबंधन की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बना दिया है।

नेतन्याहू के गठबंधन को मिलीं 53 सीटें

चुनाव के शुरुआती और बाद के आंकड़ों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिखाई दीं। इस गठबंधन में उनकी पार्टी लिकुड के साथ कई दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी दल शामिल हैं। लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

हालांकि, गठबंधन का प्रदर्शन पिछली संसद की तुलना में कमजोर रहा है। पिछली नेसेट में नेतन्याहू के सहयोगी दलों के पास कुल 68 सीटें थीं। इस बार यह संख्या घटकर 53 रह गई है। इसका मतलब है कि नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती होगी।

दूसरी तरफ, पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। विपक्षी खेमे में भी बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों की कमी है।

अरब दलों ने हासिल कीं 19 सीटें

इस चुनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू अरब राजनीतिक दलों का प्रदर्शन रहा। जॉइंट लिस्ट और राम (Ra’am) पार्टी ने मिलकर कुल 19 सीटें हासिल की हैं। यह इजराइल की संसद में अरब दलों का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व बताया जा रहा है।

जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिलीं, जबकि राम पार्टी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की। इन दोनों दलों की सीटें सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, विपक्षी गठबंधन के कुछ नेताओं ने इन दलों के साथ गठबंधन करने को लेकर अपनी असहमति भी जाहिर की है।

किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?

चुनाव के अंतिम सीट बंटवारे के अनुसार प्रमुख पार्टियों की स्थिति इस प्रकार रही:

पार्टी सीटें
लिकुड 27
याशर 21
बी’याचद 12
जॉइंट लिस्ट 11
द डेमोक्रेट्स 8
राम 8
इजराइल बेतेनु 7
यूनाइटेड टोरा यहूदीवाद 7
ओत्जमा येहुदित 7
शास 6
रिलीजियस जियोनिज्म 6

इन आंकड़ों के मुताबिक, लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। वहीं, कई छोटी पार्टियों का प्रदर्शन सरकार गठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की चुनौती

इजराइल की संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, यानी उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए 8 अतिरिक्त सीटों की जरूरत होगी। वहीं, विपक्षी गठबंधन 48 सीटों पर है और उसे बहुमत के लिए 13 सीटों की आवश्यकता है।

ऐसे में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों के सामने दूसरे दलों का समर्थन हासिल करने की चुनौती है। अरब दलों के पास कुल 19 सीटें हैं, इसलिए सरकार गठन की बातचीत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, अरब दलों के साथ सहयोग को लेकर विपक्षी खेमे के भीतर भी मतभेद हैं। ऐसे में सरकार गठन की प्रक्रिया आसान नजर नहीं आ रही है।

चुनाव में रिकॉर्ड मतदान और आगे की प्रक्रिया

इस चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही। उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार मतदान प्रतिशत 77.9 रहा और कुल 57 लाख से अधिक वोट डाले गए। इसे पिछले कई दशकों में इजराइल के सबसे अधिक मतदान वाले चुनावों में शामिल किया गया है।

इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति ने 29 अक्टूबर को मतगणना पूरी होने के बाद अंतिम सीटों का बंटवारा जारी किया। आधिकारिक परिणामों को 4 नवंबर को राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग के सामने प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। वहीं, नई संसद के 10 नवंबर को शपथ लेने की योजना है।

कुल मिलाकर, इजराइल के इस चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उनके गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि नेतन्याहू अतिरिक्त समर्थन जुटाकर सरकार बना पाते हैं या विपक्षी दलों के बीच कोई नया राजनीतिक समीकरण तैयार होता है। फिलहाल, 53 सीटों के साथ नेतन्याहू के सामने सरकार गठन की चुनौती बनी हुई है

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