
(मध्य पूर्व) में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे मंडराने लगे हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तीखी चेतावनियों और धमकियों के ठीक बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) की है। इस अचानक हुए हमले से ईरान के प्रमुख शहरों में देर रात तक धमाकों की आवाज़ें गूंजती रहीं। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) में जहाजों पर हुए हालिया हमलों के बाद शुरू हुई यह तनातनी अब एक पूर्ण सैन्य टकराव का रूप लेती दिख रही है।
1. रात के अंधेरे में थर्राए ईरानी शहर
प्राप्त शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना और नौसेना द्वारा चलाए गए इस संयुक्त ऑपरेशन में ईरान के कई महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बनाया गया। तेहरान, इसफ़हान और तटीय इलाकों के पास स्थित सैन्य अड्डों और मिसाइल डिपो पर अमेरिकी फाइटर जेट्स ने कई सटीक हमले किए।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हवाई हमलों के बाद कई इलाकों में भीषण आग लग गई और एम्बुलेंस व सुरक्षा बलों की गाड़ियाँ सड़कों पर दौड़ती नज़र आईं। हालाँकि, अभी तक दोनों पक्षों की ओर से जान-माल के नुकसान के आधिकारिक और अंतिम आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि ईरान के वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) को भारी नुकसान पहुँचा है।
2. ट्रम्प की चेतावनी और सीजफायर का अंत
यह सैन्य कार्रवाई बिना किसी पूर्व चेतावनी के नहीं हुई है। बीते दिनों डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने बयानों में स्पष्ट कर दिया था कि यदि ईरान या उसके समर्थक गुटों ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, तो इसका गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
ट्रम्प के इस आक्रामक रुख के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा नाजुक ‘सीजफायर’ पूरी तरह टूट चुका है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस एयरस्ट्राइक के साथ ही शांति वार्ता की सभी गुंजाइशें फिलहाल समाप्त हो गई हैं और क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर पहुँच गई है।
3. स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Hormuz) क्यों बना मुख्य केंद्र?
इस पूरे सैन्य टकराव की मुख्य जड़ विश्व का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग — ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) है।
जहाजों पर हमला: पिछले कुछ दिनों में होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाले कमर्शियल (व्यापारिक) और तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा संदिग्ध मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए थे।
वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा: दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) का लगभग 20% हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।
अमेरिका का जवाब: अमेरिका ने इन हमलों को वैश्विक सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए सीधा खतरा बताते हुए ईरान पर इस सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है।
4. वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्रूड ऑयल पर असर
अमेरिका की इस एयरस्ट्राइक का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर देखने को मिल रहा है:
क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों में उछाल: हमले की खबर बाहर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमतों में भारी बढ़त दर्ज की गई है।
शेयर बाजारों में गिरावट: वैश्विक शेयर बाजारों (Global Stock Markets) में अनिश्चितता का माहौल है और निवेशकों में भारी बिकवाली देखी जा रही है।
महंगाई का खतरा: यदि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत सहित कई एशियाई और यूरोपीय देशों में ईंधन की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाएगा।
5. ईरान की प्रतिक्रिया और आगे क्या?
अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व और नेताओं ने इस हमले को ‘अपनी संप्रभुता का उल्लंघन’ बताते हुए इसका करारा जवाब देने की कसम खाई है।
ईरान की ओर से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों (US Military Bases) और उनके मित्र देशों पर जवाबी मिसाइल हमलों की संभावना जताई जा रही है। यदि ईरान ने पलटवार किया, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक बड़े अंतरराष्ट्रीय युद्ध (Regional War) का रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी यह नई जंग न सिर्फ मध्य पूर्व के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा संकट बन सकती है। ट्रम्प की आक्रामकता और ईरान की जिद ने वैश्विक शांति को खतरे में डाल दिया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया की प्रमुख शक्तियों को इस तनाव को कम करने के लिए तुरंत कूटनीतिक हस्तक्षेप करने की जरूरत है, वरना आने वाले दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवता के लिए बेहद भारी साबित हो सकते हैं।
ईरान पर अमेरिका की एयरस्ट्राइक: ट्रम्प की धमकी के बाद कई शहरों में धमाके, होर्मुज में तनाव बढ़ा
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