Monday, September 7, 2026

जंतर-मंतर वाले मोहम्मद इरफान का यूट्यूब चैनल टर्मिनेट, 24 घंटे में मिले थे 70 हजार सब्सक्राइबर

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दिल्ली : के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से अचानक देशभर में पहचान बनाने वाले मोहम्मद इरफान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक शैली, संविधान के प्रति गहरी समझ और मजदूर वर्ग के हक में आवाज उठाने के लिए जाने जाने वाले इरफान का नया यूट्यूब चैनल अचानक बंद (Terminated) कर दिया गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि चैनल शुरू होने के महज 24 घंटे के भीतर ही इस पर 70 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर्स जुड़ चुके थे। हालांकि, बाद में सोशल मीडिया पर भारी समर्थन और अपील के बाद यूट्यूब के ऑटोमेटेड सिस्टम की इस गलती को सुधारते हुए उनके चैनल को रीस्टोर (बहाल) कर दिया गया।

कौन हैं मोहम्मद इरफान और कैसे आए चर्चा में?

दिल्ली की सवदा जेजे कॉलोनी (झुग्गी बस्ती) में रहने वाले 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान एक साधारण फेरीवाले (Hawker) हैं। बिना किसी औपचारिक स्कूली शिक्षा और राजनीतिक पृष्ठभूमि के होने के बावजूद, इरफान की देश के सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर पकड़ बेहद बारीक है।

हाल ही में जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान मीडिया इंटरव्यू में जब उन्होंने भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का पाठ किया और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, सस्ती शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों पर खुलकर बात की, तो उनका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी उनसे मुलाकात की और उनके विचारों की सराहना की थी।

 24 घंटे में रिकॉर्ड ग्रोथ और फिर चैनल बंद

वरिष्ठ पत्रकारों और अपने समर्थकों की सलाह पर मोहम्मद इरफान ने **’Main Irfan’** (@mohirfanofficial) नाम से अपना आधिकारिक यूट्यूब चैनल शुरू किया था।

अभूतपूर्व समर्थन:चैनल बनते ही लोगों का भारी समर्थन मिला। मात्र कुछ ही घंटों में सब्सक्राइबर्स की संख्या 26,000 पार कर गई और 24 घंटे के भीतर यह आंकड़ा 70,000 के पार पहुंच गया।

अचानक एक्शन: शनिवार सुबह जब यूज़र्स ने उनके चैनल पर क्लिक किया, तो वहां एक मैसेज दिखाई दिया— *”This account has been terminated for violating Google’s Terms of Service”* यानी गूगल की सेवा शर्तों का उल्लंघन करने के कारण यह अकाउंट बंद कर दिया गया है।

 इरफान की सफाई और सोशल मीडिया पर विरोध

चैनल बंद होते ही मोहम्मद इरफान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म **X** (ट्विटर) पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका चैनल पूरी तरह नया है और उन्होंने यूट्यूब की सभी कम्युनिटी गाइडलाइन्स का ईमानदारी से पालन किया है। उन्होंने अंदेशा जताया कि यह यूट्यूब के ऑटोमेटेड एल्गोरिदम की कोई तकनीकी गलती हो सकती है और प्लेटफॉर्म से समीक्षा की मांग की।

इस मुद्दे पर कई वरिष्ठ पत्रकारों और आम सोशल मीडिया यूजर्स ने इरफान का खुलकर समर्थन किया। लोगों का कहना था कि इतनी तेजी से सब्सक्राइबर्स बढ़ने (Spike in Growth) के कारण एल्गोरिदम ने इसे स्पैम या फर्जी गतिविधि समझ लिया होगा। पत्रकार अजीत अंजुम समेत कई हस्तियों ने यूट्यूब इंडिया को टैग करते हुए सवाल उठाए कि एक मजदूर वर्ग के युवा की आवाज को इस तरह अचानक क्यों दबाया गया।

 यूट्यूब ने सुधारी गलती, चैनल हुआ रीस्टोर

सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर उठे विरोध और अपीलों के बाद यूट्यूब ने मामले का संज्ञान लिया। समीक्षा के बाद यूट्यूब ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मोहम्मद इरफान का चैनल रीस्टोर (पुनर्स्थापित) कर दिया। चैनल वापस आने के बाद इरफान ने अपने तमाम समर्थकों और सोशल मीडिया यूजर्स का आभार व्यक्त किया।

यह पूरी घटना दिखाती है कि डिजिटल दुनिया में जहां ऑटोमेटेड सिस्टम कभी-कभी नए क्रिएटर्स के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं, वहीं सही मायनों में मिला जनता का प्यार किसी भी आवाज को दबाने नहीं देता।

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