Monday, September 7, 2026

नेपाल में बाढ़-तबाही का खौफनाक मंजर! 1222 शव बरामद, 4875 लोग अब भी लापता

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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद तबाही का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 1,222 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4,875 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए सुरक्षाबलों और राहत टीमों का अभियान लगातार जारी है।

बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

26 अगस्त को नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा ने कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास अचानक आई बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में पानी, मिट्टी, चट्टान और मलबा लेकर आई। देखते ही देखते कई बस्तियां, सड़कें, पुल और दूसरी महत्वपूर्ण संरचनाएं इसकी चपेट में आ गईं।

बाढ़ का पानी बेहद तेज गति से नीचे की ओर बढ़ा, जिसके कारण लोगों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। कई इलाकों में संपर्क टूट गया और बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग स्थानों पर फंस गए।

1,222 शव बरामद, हजारों लोग लापता

नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1,222 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें बच्चों, महिलाओं और पुरुषों के अलावा बड़ी संख्या में ऐसे मानव अवशेष भी शामिल हैं, जिनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। पुलिस ने बताया कि 421 आंशिक शव और 82 अज्ञात शव भी बरामद हुए हैं। वहीं, 4,875 लोग अभी भी लापता हैं।

लापता लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके बारे में जानकारी जुटाना और संभावित स्थानों पर तलाश अभियान चलाना है। कई शव बाढ़ के तेज बहाव में काफी दूर तक बह गए, जिससे उनकी पहचान और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है।

कई जिलों में पहुंचा बाढ़ का कहर

इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल के कई जिलों में देखने को मिला है। रासुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन, तनहूं, नवलपरासी ईस्ट और नवलपरासी वेस्ट में बड़े पैमाने पर शव बरामद किए गए हैं।

बाढ़ का पानी और मलबा कई किलोमीटर तक बहकर नीचे के इलाकों में पहुंचा। इसी वजह से शुरुआती आपदा वाले क्षेत्र से काफी दूर भी शव बरामद किए गए हैं। पड़ोसी भारत में भी कुछ शव मिलने की जानकारी सामने आई है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे लोगों की तलाश

नेपाल में राहत और बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी चिंता हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे कर्मचारियों को लेकर बनी हुई है। बाढ़ ने कई जलविद्युत परियोजनाओं और उनके आसपास के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।

कई लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल इन सुरंगों और मलबे से भरे क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भारी मलबे के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल के अलावा भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की टीमें भी राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग कर रही हैं।

शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती

आपदा के बाद एक और गंभीर समस्या सामने आई है—अज्ञात शवों की पहचान। बड़ी संख्या में बरामद शवों की हालत खराब होने के कारण उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन और विशेषज्ञ डीएनए नमूनों तथा अन्य फॉरेंसिक तरीकों की मदद से मृतकों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।

नेपाल पुलिस ने अज्ञात शवों से संबंधित जानकारी ऑनलाइन भी उपलब्ध कराई है, ताकि लापता लोगों के परिवार तस्वीरों और विवरण के जरिए अपने परिजनों की पहचान कर सकें।

कई परिवार अब अस्पतालों और राहत केंद्रों के आसपास अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं। राजधानी काठमांडू में भी लापता लोगों के परिजन तस्वीरों और जानकारियों के जरिए अपनों का सुराग पाने की कोशिश कर रहे हैं।

हजारों परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस बाढ़ ने सिर्फ जान-माल का नुकसान नहीं किया, बल्कि हजारों परिवारों को उजाड़ दिया है। कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी इस उम्मीद में हैं कि उनके लापता रिश्तेदार किसी सुरक्षित स्थान पर मिल जाएंगे।

जिन इलाकों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर हुआ है, वहां कई घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं। सड़कों और पुलों के टूटने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। सरकार अब प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दे रही है।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। पुलिस, सेना और सशस्त्र बलों के हजारों जवान राहत कार्यों में लगाए गए हैं। बचाव दल मलबे, नदी किनारे के क्षेत्रों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में लगातार तलाश कर रहे हैं।

अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी, दवाइयां और दूसरी जरूरी वस्तुएं उपलब्ध कराने का काम भी चल रहा है।

आगे की चुनौती और बड़ी

नेपाल के सामने अब सिर्फ लापता लोगों को खोजने की चुनौती नहीं है, बल्कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण का भी बड़ा सवाल है। बाढ़ ने हजारों घरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। कई प्रभावित परिवारों को लंबे समय तक अस्थायी शिविरों या सुरक्षित इलाकों में रहना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर अर्ली वार्निंग सिस्टम, आपदा प्रबंधन और सुरक्षित पुनर्वास व्यवस्था तैयार करने की चुनौती भी है।

फिलहाल नेपाल में हर गुजरते घंटे के साथ राहत और बचाव दलों की नजर उन 4,875 लापता लोगों पर टिकी हुई है। 1,222 शवों की बरामदगी ने आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है, लेकिन हजारों परिवार अब भी अपने अपनों की वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बचाव अभियान जारी है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा बदल सकता है।

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