
मुंबई में CJP प्रदर्शन को लेकर शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक हलचल तेज हो गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। इसी बीच CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके प्रदर्शन से जुड़े कार्यक्रम में पहुंचे। पार्टी ने इस प्रदर्शन को अपने आंदोलन के दूसरे चरण की शुरुआत बताया है।
शिवाजी पार्क से आंदोलन शुरू करने का ऐलान
CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क से अपने देशव्यापी प्रदर्शन की शुरुआत करने की घोषणा की थी। दिपके ने पहले ही कहा था कि अगर CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो संगठन अपने आंदोलन को देश के दूसरे हिस्सों तक ले जाएगा।
Aaj Tak की रिपोर्ट के मुताबिक, CJP ने मुंबई के शिवाजी पार्क के गेट नंबर 6 के पास शाम 4 बजे प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा था। इसके बाद गोवा, कोलकाता, पटना, उत्तर प्रदेश और बेंगलुरु समेत अन्य जगहों पर भी प्रदर्शन करने की योजना बताई गई।
दिपके ने कहा कि अक्टूबर के आखिर में CJP दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन कर सकती है। उनके मुताबिक, यह प्रदर्शन तब तक जारी रखने की योजना है, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
CJP के आंदोलन का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। संगठन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।
Aaj Tak के अनुसार, CJP ने अपनी मांगों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और अगले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग भी शामिल की है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मतदाता सूची और SIR को लेकर अलग-अलग राजनीतिक संगठनों की ओर से कई दावे किए जा रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग ने पहले कहा है कि SIR समेत उसके फैसले निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं और आयोग के भीतर अलग-अलग राय या टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती हैं।
प्रदर्शन को लेकर अनुमति का मुद्दा
मुंबई में CJP के प्रदर्शन को लेकर अनुमति का मुद्दा भी चर्चा में रहा। रिपोर्टों के अनुसार, संगठन ने प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मिलने के बावजूद कार्यक्रम जारी रखने की बात कही थी।
दिपके ने इससे पहले कहा था कि अगर उन्हें हिरासत या जेल जाना पड़ा तो वे इसके लिए तैयार हैं। 1 अक्टूबर को दिए बयान में उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने की बात दोहराई थी।
मुंबई पुलिस की ओर से प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और अनुमति से जुड़े सवाल भी सामने आए। इस बीच प्रदर्शन स्थल के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
दिपके की हिरासत को लेकर भी विवाद
प्रदर्शन से पहले अभिजीत दिपके को लेकर हिरासत की खबरें भी सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि उन्हें मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ले जाया गया था। वहीं CJP की ओर से उनकी हिरासत की खबरों को लेकर अलग दावा किया गया।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, दिपके को प्लेकार्ड के साथ नजर आने के बाद मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन ले जाया गया था। दूसरी ओर CJP के प्रवक्ता ने कहा कि दिपके को गिरफ्तार या औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं लिया गया था।
इस घटनाक्रम ने 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले ही मामले को चर्चा में ला दिया।
दूसरे शहरों में भी प्रदर्शन की तैयारी
CJP ने अपने आंदोलन को सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रखने की बात कही है। संगठन के मुताबिक, मुंबई के बाद देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन किए जाएंगे। Aaj Tak के अनुसार, गोवा, कोलकाता, पटना, उत्तर प्रदेश और बेंगलुरु में भी कार्यक्रम की योजना बताई गई है।
संगठन ने अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की भी बात कही है। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रमों की अनुमति और प्रशासनिक स्थिति अलग हो सकती है।
दूसरे संगठनों का भी विरोध प्रदर्शन
CJP के प्रदर्शन के बीच मुंबई में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर अन्य राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की गतिविधियां भी सामने आई हैं। Reuters के मुताबिक, 2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई समेत कई जगहों पर अलग-अलग समूहों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किए।
मुंबई में CJP का कार्यक्रम इसी व्यापक राजनीतिक बहस के बीच हुआ है। वहीं चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं।
आगे क्या होगा?
अभिजीत दिपके और CJP ने संकेत दिया है कि मुंबई का प्रदर्शन उनके आंदोलन का अंतिम चरण नहीं है। संगठन की योजना इसे देश के अन्य शहरों तक ले जाने की है। अक्टूबर के अंत में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा भी की गई है।
फिलहाल मुंबई में CJP प्रदर्शन, अभिजीत दिपके की मौजूदगी और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग ने चुनाव आयोग से जुड़े राजनीतिक विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है और प्रशासन की ओर से इसे लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
