
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर आम नागरिकों के लिए बड़ी त्रासदी लेकर आया है। यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमले में 40 लोगों की मौत हो गई है। यह हमला कोमिशुवाखा गांव में एक ऐसे स्कूल पर किया गया, जिसका इस्तेमाल मानवीय सहायता बांटने और स्थानीय लोगों को सुरक्षित रखने के लिए किया जा रहा था। हमले के वक्त वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। इजरायल ने भी इस हमले पर दुख जताते हुए रूस की कार्रवाई की निंदा की है।
इजरायल के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन के कोमिशुवाखा से आई खबर बेहद दुखद है, जहां रूसी हमले में 40 लोगों की जान चली गई। इजरायल ने हमले में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। इसके साथ ही मंत्रालय ने बताया कि हमले के बाद कई लोग अब भी लापता हैं।
2 नवंबर को स्कूल पर किया गया था हमला
जानकारी के मुताबिक, रूस ने 2 नवंबर को यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र के कोमिशुवाखा गांव में हवाई हमला किया था। इस हमले में एक स्कूल को निशाना बनाया गया। हालांकि, यह स्कूल सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं हो रहा था, बल्कि यहां स्थानीय लोगों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही थी।
यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल में लोगों को राहत सामग्री बांटी जा रही थी। यह जगह स्थानीय नागरिकों के लिए सहायता केंद्र और सुरक्षित आश्रय के रूप में भी काम कर रही थी। इसी दौरान रूसी सेना ने हवाई बमों से हमला किया। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूसी सेना ने इस इलाके में नौ गाइडेड एरियल बम गिराए।
हमले के कारण स्कूल की इमारत और उसके आसपास के हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा। कई लोग मलबे में दब गए। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया।
मृतकों की संख्या बढ़कर 40 हुई
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने 4 नवंबर को जानकारी दी कि इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान लगातार जारी है और कई शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
जेलेंस्की के मुताबिक, 30 से अधिक लोगों के अब भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। घटनास्थल पर बचाव दल, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं।
इस हमले में बचाव अभियान में शामिल दो कर्मचारियों और चार पुलिसकर्मियों की भी मौत हुई है। ये कर्मचारी हमले के बाद लोगों की मदद करने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए मौके पर पहुंचे थे। लेकिन लगातार हमलों के खतरे ने राहत और बचाव कार्य को और मुश्किल बना दिया।
बचाव अभियान में भी आ रही हैं मुश्किलें
हमले के बाद से ही घटनास्थल पर लगातार तलाशी और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, क्षेत्र में नए रूसी हमलों और ड्रोन गतिविधियों का खतरा बना हुआ है। इस वजह से बचावकर्मियों को काफी सावधानी के साथ काम करना पड़ रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि बचाव अभियान बेहद कठिन परिस्थितियों में चलाया जा रहा है। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए सभी जरूरी आपातकालीन सेवाओं को लगाया गया है। इसके बावजूद लगातार खतरे के कारण राहत कार्य में बाधाएं आ रही हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि कुछ मृतकों की पहचान के लिए डीएनए जांच की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना के बाद जापोरिज्जिया क्षेत्र में तीन दिन के शोक की घोषणा भी की गई थी। 3 से 5 नवंबर तक क्षेत्र में मृतकों को श्रद्धांजलि दी जा रही है।
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की कार्रवाई की मांग
इस हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद दुनिया की तरफ से पर्याप्त प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से यूक्रेन को और मजबूत हवाई सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि रूस के हमलों से आम नागरिकों और राहत कार्यों में जुटे लोगों की जान को लगातार खतरा बना हुआ है। ऐसे हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा रुख अपनाने की जरूरत है। यूक्रेन का आरोप है कि मानवीय सहायता केंद्र को निशाना बनाना बेहद गंभीर मामला है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र की यूक्रेन में मानवाधिकार निगरानी टीम ने प्रारंभिक आकलन में कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है। इस बयान के बाद घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है।
रूस ने हमले को लेकर क्या कहा?
दूसरी तरफ रूस ने इस हमले को लेकर अलग दावा किया है। रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसकी सेना ने कोमिशुवाखा और आसपास के इलाकों में यूक्रेनी सैन्य इकाइयों को निशाना बनाया था। रूस ने अपने सैन्य अभियान को सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई बताया है।
हालांकि, यूक्रेन का कहना है कि जिस स्थान पर हमला हुआ, वहां आम नागरिक मानवीय सहायता लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। इसी वजह से इस घटना को लेकर दोनों देशों के दावों में अंतर है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ा मानवीय संकट
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को कई साल हो चुके हैं, लेकिन अब भी आम नागरिक इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। लगातार हवाई हमले, मिसाइल हमले और ड्रोन हमलों के कारण कई शहरों और गांवों में लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है।
कोमिशुवाखा में हुआ यह हमला भी इसी मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर पेश करता है। जिस स्थान पर लोगों को राहत सामग्री मिलनी थी, वही जगह हमले की चपेट में आ गई। इजरायल की ओर से दुख जताने और हमले की निंदा करने के बाद अब इस घटना पर अन्य देशों की प्रतिक्रियाओं पर भी नजर बनी हुई है।
फिलहाल यूक्रेन में बचाव अभियान जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। 40 लोगों की मौत और 30 से अधिक लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका ने इस हमले को युद्ध की सबसे गंभीर मानवीय घटनाओं में शामिल कर दिया है।
